2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 12 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर 24 जुलाई को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
मामला क्या है?
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में मात्र 11 मिनट के भीतर 7 सीरियल बम धमाके हुए थे।
➡️ 189 लोगों की मौत हुई थी और
➡️ 827 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
कोर्ट का निर्णय और प्रतिक्रिया
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2015 में स्पेशल टाडा कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था:
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5 को मृत्युदंड
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7 को आजीवन कारावास
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जुलाई 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 को बरी कर दिया और तुरंत रिहाई का आदेश दिया।
“अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर पाया कि किस प्रकार के बम प्रयोग हुए थे” – कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तुरंत सुनवाई की मांग की।
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CJI बीआर गवई की पीठ ने 24 जुलाई की सुनवाई तय की।
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सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
केस का समयक्रम (Timeline)
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 2006 | विस्फोट और चार्जशीट दाखिल |
| 2015 | ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि का फैसला |
| 2025 | बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया |
| 24 जुलाई 2025 | सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय |
इस बहुचर्चित मामले में अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम होगा। यह न सिर्फ न्याय प्रक्रिया बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी गहन असर डाल सकता है।
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