अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को से एक बार फिर बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। यह फैसला अमेरिका के विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने मंगलवार को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को “विभाजनकारी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों” को बढ़ावा दे रहा है और उसका फोकस सतत विकास पर अत्यधिक हो गया है।
दूसरी बार यूनेस्को से बाहर हुआ अमेरिका
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका यूनेस्को से अलग हुआ है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भी अमेरिका ने यूनेस्को से खुद को अलग कर लिया था। हालांकि जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में अमेरिका दोबारा इसका हिस्सा बना। अब एक बार फिर ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत यह वापसी हो रही है।
📌 मुख्य वजहें:
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यूनेस्को द्वारा ‘फिलिस्तीन राज्य’ को सदस्यता देना।
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इजराइल विरोधी कथित बयानबाजी को बढ़ावा देना।
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वैश्विक विकास और वैचारिक एजेंडा जो अमेरिका की विदेश नीति से मेल नहीं खाता।
यह वापसी कब से लागू होगी?
टैमी ब्रूस के अनुसार, यह वापसी अगले साल के अंत तक प्रभावी होगी। यानी अमेरिका ने यूनेस्को को आधिकारिक नोटिस दे दिया है।
किसने क्या कहा?
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता ने अमेरिका की इस वापसी पर गहरा खेद जताया।
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यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने कहा कि यह निर्णय बहुपक्षवाद के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और अमेरिका के अंदर ही कई समुदाय इससे प्रभावित होंगे।
अमेरिका का योगदान कितना था?
2023 में अमेरिका ने यूनेस्को को 28 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था, जो उसके बजट का 22% था। हालांकि, अब यह घटकर लगभग 8% रह गया है, क्योंकि संगठन ने वैकल्पिक स्रोतों से फंडिंग सुनिश्चित कर ली है।
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