झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले अभय कुजूर ने जेपीएससी 2023 परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त कर राज्य भर में नाम रोशन किया है। उनकी सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास की मिसाल है।
पिता की शहादत बनी प्रेरणा, मां और बहनों का मिला समर्थन
अभय के पिता अविनाश कुजूर, वर्ष 2019 में देश की सेवा में शहीद हो गए थे। इस कठिन समय में अभय की मां और दो बहनों ने पूरे परिवार को संभाला। अभय कहते हैं:
“मेरे पिता की शहादत ने मुझे समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। मेरी मां और बहनों ने हर मुश्किल घड़ी में मेरा साथ दिया और मुझे हार नहीं मानने दी।”
2019 से शुरू की तैयारी, पहले प्रयास में असफलता, दूसरे में सफलता
अभय ने 2019 में एमएससी (जियोलॉजी) के दौरान अपनी तैयारी शुरू की थी। पहले वे SSC CGL की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने जेपीएससी पर ध्यान केंद्रित किया।
उनका पहला प्रयास 2021 में असफल रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
“मैंने विवादों और नकारात्मक खबरों पर ध्यान नहीं दिया और केवल अपनी तैयारी पर फोकस किया।”
खोरठा भाषा का चयन और स्थानीय ज्ञान पर विशेष जोर
अभय ने बताया कि उन्होंने खोरठा भाषा को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना, क्योंकि उन्हें इसमें हिंदी के साथ समानताएं दिखीं। उन्होंने झारखंड के इतिहास, भूगोल और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया।
“राज्य में सेवा के लिए स्थानीय विषयों की जानकारी बहुत जरूरी होती है।”
पुस्तकालय, मार्गदर्शन और प्रशासनिक सेवा की ओर झुकाव
अभय ने पुस्तकालय में पढ़ाई के दौरान कई अनुभवी उम्मीदवारों और अधिकारियों से प्रेरणा ली।
“मैंने देखा कि प्रशासनिक अधिकारी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। एक अधिकारी से मुलाकात मेरे लिए टर्निंग पॉइंट बनी।”
सफलता का मंत्र: निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और धैर्य
“सफलता मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। सही दिशा में ईमानदारी से की गई कोशिश कभी व्यर्थ नहीं जाती।”
✅ अभय कुजूर की सफलता से मिलती हैं ये 5 सीखें:
- संघर्षों के बावजूद हार नहीं माननी चाहिए।
- पारिवारिक सहयोग सबसे बड़ी ताकत होता है।
- स्थानीय विषयों की समझ प्रतियोगी परीक्षाओं में अहम होती है।
- नेगेटिविटी से दूर रहकर फोकस बनाए रखना जरूरी है।
- प्रेरणास्रोत लोगों से मिलना और सीखना सफलता की कुंजी है।
अभय कुजूर की सफलता न केवल खूंटी या झारखंड के युवाओं के लिए, बल्कि देश भर के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपने सपनों को साकार करने की जिद रखते हैं।
👉 आप अभय कुजूर की इस सफलता से कितना प्रेरित हुए? नीचे कमेंट में बताएं।
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