- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
तारीख: 12 अगस्त 2025
तृतीया तिथि प्रारंभ: 11 अगस्त, सुबह 10:33 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 12 अगस्त, सुबह 8:40 बजे
(उदयातिथि के अनुसार व्रत 12 अगस्त को मनाया जाएगा)
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला कजरी तीज स्त्री तप, धैर्य और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन खास तौर पर शिव-पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ा है, जब देवी पार्वती ने 108 जन्मों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया।
कजरी तीज का महत्व
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विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
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अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए उपवास करती हैं।
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यह व्रत नारी शक्ति, अखंड सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक है।
नीमड़ी पूजन का महत्व
कजरी तीज पर नीम की पूजा (नीमड़ी पूजन) विशेष महत्व रखती है।
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नीम को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है।
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पूजा में हल्दी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और सोलह श्रृंगार अर्पित किए जाते हैं।
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नीम की शीतलता और औषधीय गुण तन-मन को शुद्ध करते हैं।
पूजा विधि
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सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
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हरी साड़ी, हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी से सोलह श्रृंगार करें।
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भगवान शिव-पार्वती और नीम के पेड़ की पूजा करें।
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रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करें।
🌸 इस कजरी तीज पर अपने प्रियजनों के साथ इस पवित्र व्रत का महत्व साझा करें।
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