- न्यूज मंत्रा एस्ट्रो डेस्क
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 19 अगस्त 2025 को पड़ेगा।
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एकादशी तिथि प्रारंभ: 18 अगस्त शाम 5:22 बजे
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एकादशी तिथि समाप्त: 19 अगस्त दोपहर 3:32 बजे
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सूर्योदय: सुबह 5:52 बजे
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सूर्यास्त: शाम 6:57 बजे
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राहुकाल: दोपहर 3:40 से शाम 5:19 तक
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नक्षत्र: आर्द्रा, 20 अगस्त प्रातः 1:07 बजे तक
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विशेष योग: त्रिपुष्कर योग
इस बार अजा एकादशी पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो व्रत को अत्यंत फलदायी बनाता है।
अजा एकादशी का महत्व
अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। धर्मग्रंथों में इसका महत्व अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत से:
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पापों का नाश होता है,
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मोक्ष की प्राप्ति होती है,
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परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि इस व्रत का पालन करने से जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त होते हैं। इसकी कथा में राजा हरिश्चंद्र का उल्लेख है, जिन्होंने अजा एकादशी के प्रभाव से अपने राज्य, पत्नी और पुत्र को पुनः प्राप्त किया था।
अजा एकादशी पूजा विधि
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ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूर्व दिशा में भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
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पीले वस्त्र पर कलश रखें और दीप प्रज्वलित करें।
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भगवान को पंचामृत स्नान कराएं, वस्त्र पहनाएं और चंदन, रोली, फूल, तुलसी अर्पित करें।
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‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘विष्णवे नम:’ मंत्र का जप करें।
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विष्णु सहस्रनाम और गीता का पाठ करें।
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निर्जला उपवास रखें और रात्रि में जागरण करें।
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द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें और व्रत का पारण करें।
त्रिपुष्कर योग का महत्व
त्रिपुष्कर योग नक्षत्र, वार और तिथि के विशेष संयोग से बनता है। शास्त्रों में इसे शुभ माना गया है, क्योंकि इस योग में किए गए कार्य तीन गुना फल प्रदान करते हैं।
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व्यापार, पूजन, दान और व्रत का विशेष महत्व
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स्थायी सफलता और समृद्धि की प्राप्ति
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भगवान विष्णु की पूजा करने से धन, सुख और मोक्ष लाभ
इस बार अजा एकादशी और त्रिपुष्कर योग का संयोग भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।
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