- न्यूज मंत्रा लाइव इंटरनेशनल डेस्क
बांग्लादेश इस समय यौन हिंसा की भयावह लहर का सामना कर रहा है। ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (एचआरसीबीएम) ने शुक्रवार को खुलासा किया कि देश में विशेष रूप से हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
ढाका स्थित मानवाधिकार संस्था ऐन ओ सलीश केंद्र (एएसके) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि 2025 की पहली तिमाही में 342 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें से 87% पीड़ित नाबालिग लड़कियां थीं।
रिपोर्ट के अनुसार:
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40 पीड़ित बच्चों की उम्र शिशु से लेकर 6 साल तक थी।
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सामूहिक बलात्कार की घटनाओं में तेजी आई है।
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वास्तविक मामलों की संख्या हजारों में है, लेकिन अधिकांश घटनाएँ भय, सामाजिक कलंक और न्याय प्रणाली पर अविश्वास के कारण दर्ज नहीं होतीं।
धार्मिक पूर्वाग्रह और न्याय की कमी
अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों के मामले में स्थिति और भी गंभीर है। परिवारों को पुलिस और निचली अदालतों में धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते न्याय की प्रक्रिया बाधित होती है।
एचआरसीबीएम ने अपने बयान में बताया कि कई मामलों में महिलाओं और लड़कियों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में मिले हैं।
हिंदू नेताओं पर कार्रवाई
मानवाधिकार संस्था ने आरोप लगाया कि यूनुस शासन के दौरान अल्पसंख्यकों की आवाज़ उठाने वाले नेताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। चिन्मय कृष्ण दास, जो हिंदू संगठन के प्रवक्ता हैं, नवंबर से जेल में बंद हैं और उन पर हत्या सहित कई मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं।
एचआरसीबीएम ने सवाल उठाया कि क्या उनका अपराध सिर्फ सत्ता के सामने सच बोलना था?
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