- न्यूज मंत्रा लाइव बिजनेस डेस्क
भारतीयों के लिए क्रेडिट स्कोर निर्धारित करने वाली कंपनी सिबिल (CIBIL) अब जांच के घेरे में है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, इसकी पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
तमिलनाडु के सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने हाल ही में लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस सिस्टम में पारदर्शिता का अभाव है। उधारकर्ताओं के पास अपने क्रेडिट इतिहास में गलतियों के खिलाफ अपील करने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है।
📌 मुख्य बिंदु:
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क्रेडिट स्कोर की जिम्मेदारी निजी कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की है।
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किसानों और छोटे कर्जदारों को समस्याएं तब होती हैं जब सब्सिडी या कर्ज निपटान के भुगतान उनके रिकॉर्ड में अपडेट नहीं होते।
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लोन से लेकर क्रेडिट कार्ड तक हर जगह सिबिल स्कोर अहम है, लेकिन अपडेट और अपील की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
💬 सांसद चिदंबरम का बयान:
“यह वास्तव में एक निजी कंपनी है, जो हमारी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर रेटिंग करती है। लेकिन हमें नहीं पता कि वे हमारी क्रेडिट हिस्ट्री को सही तरीके से अपडेट कर रहे हैं या नहीं। इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है।”
यूजर्स की शिकायतें:
कई लोगों ने ऑनलाइन लिखा है कि सिबिल स्कोर चेक करने के तुरंत बाद उन्हें बजाज फाइनेंस और पैसाबाजार से स्पैम कॉल आने लगे।
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एक यूजर ने कहा कि दो क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के बाद उन्हें प्री-अप्रूव्ड लोन के लगातार कॉल आए।
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दूसरे ने लिखा कि पैसाबाजार पर स्कोर चेक करने के बाद रोजाना स्पैम कॉल आ रहे हैं।
समस्या का असर:
लोन आवेदन में देरी, गलत स्कोर अपडेट, और प्राइवेसी को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है। संसद में उठने के बाद अब इस मामले की जांच तेज होने की उम्मीद है।
👉 क्या आपको भी सिबिल स्कोर चेक करने के बाद स्पैम कॉल आते हैं? अपने अनुभव हमें कमेंट में जरूर बताएं और इस खबर को शेयर कर ज्यादा लोगों तक पहुँचाएं।
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