- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा को समर्पित होता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता, शक्ति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।
देवी कूष्मांडा का महत्व
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दुर्गा पुराण के अनुसार, मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली देवी माना जाता है।
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उनकी मुस्कान से सृष्टि का आरंभ हुआ और अंधकार दूर हुआ।
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मां में सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है, इसलिए उनकी पूजा से ऊर्जा और आत्मबल मिलता है।
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विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष है, क्योंकि मां की पूजा से बुद्धि और ज्ञान का विकास होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 से 12:37 तक
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राहुकाल: दोपहर 1:43 से 3:13 तक
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इस दिन रॉयल ब्लू रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग आत्मविश्वास, शक्ति और गहराई का प्रतीक है।
पूजा विधि
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ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूजा स्थल की चौकी पर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
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माता को पान, सुपारी, पुष्प, फल और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
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विशेष रूप से गुड़हल का फूल, लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
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देवी को मालपुआ का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
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दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
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अंत में पूरे घर में आरती अवश्य करें।
पूजा के लाभ
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जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
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सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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विद्यार्थियों को ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
👉 क्या आप नवरात्रि में सही पूजा विधि से मां कूष्मांडा की आराधना कर रहे हैं?
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💬 नीचे कमेंट करके बताएं – नवरात्रि के चौथे दिन आप कौन-सा विशेष भोग अर्पित करते हैं?
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