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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नवरात्रि का पांचवा दिन माना जाता है। इस दिन मां स्कंदमाता, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, की आराधना की जाती है।
मां स्कंदमाता कमल पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनके चार भुजाएं हैं—एक हाथ में कमल पुष्प, दूसरे में बाल स्कंद और शेष दो हाथों से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
मां स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख, ज्ञान, शक्ति और समृद्धि मिलती है।
ये सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनकी भक्ति से भक्त तेजस्वी और कांतिमान बनता है।
स्कंदमाता की आराधना करने से शत्रु नाश होते हैं और मन की शांति प्राप्त होती है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ पीले वस्त्र धारण करें।
चौकी को गंगाजल से शुद्ध कर मां की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
लाल चुनरी, फूल (विशेषकर गुड़हल), चंदन, रोली, अक्षत और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
मिठाई और फल का भोग लगाएं।
मां स्कंदमाता की कथा का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें।
दुर्गा आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
पुराणों के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं के सेनापति बने। माता पार्वती का यह मातृत्वपूर्ण रूप ही स्कंदमाता कहलाता है। इनकी भक्ति से भवसागर पार करना सरल हो जाता है।
सूर्य: कन्या राशि में विराजमान
चंद्रमा: दोपहर 3:23 तक तुला राशि में, उसके बाद वृश्चिक राशि में
अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:36 PM
राहुकाल: 10:42 AM – 12:12 PM
क्या आप नवरात्रि 2025 में मां स्कंदमाता की विशेष पूजा विधि अपनाने वाले हैं?
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