- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को नवरात्रि का छठा दिन मनाया जाता है। यह दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है। मां कात्यायनी शक्ति और साहस की प्रतीक मानी जाती हैं।
मां कात्यायनी का स्वरूप और महत्व
देवी भागवत पुराण के अनुसार, महर्षि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता का वर्ण शुभ और स्वर्ण आभा से युक्त है। उनकी चार भुजाओं में तलवार, कमल, अभय और वर मुद्रा शामिल हैं। सिंह पर सवार माता भक्तों को शक्ति और विजय का आशीर्वाद देती हैं।
मां कात्यायनी की पूजा विशेष रूप से विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए की जाती है। इन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता है।
पूजा विधि (Maa Katyayani Puja Vidhi)
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ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
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माता की चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें।
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पंचोपचार विधि से पूजा करें और लाल फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर अर्पित करें।
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श्रृंगार सामग्री जैसे – लाल चुनरी, सिंदूर, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं।
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मां को विशेष रूप से गुड़हल का फूल और मिठाई का भोग लगाएं।
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कमल का फूल हाथ में लेकर माता का ध्यान करें।
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घी या कपूर का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
👉 इस दिन सफेद और पीले रंग का प्रयोग शुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय महत्व
मां कात्यायनी शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती हैं। उनकी उपासना से भाग्य के द्वार खुलते हैं और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
👉 क्या आपने नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की? अपने अनुभव और आस्था हमारे साथ कमेंट सेक्शन में ज़रूर साझा करें। नवरात्रि की अन्य तिथियों और पूजा विधियों की जानकारी के लिए हमें फॉलो करें।
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