- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 4 अक्टूबर 2025, शनिवार को पद्मनाभ द्वादशी मनाई जाएगी। इस दिन शनि प्रदोष व्रत भी है, जिससे यह तिथि और भी विशेष हो जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और साधक को सुख-समृद्धि एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पद्मनाभ द्वादशी 2025: शुभ मुहूर्त
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द्वादशी तिथि प्रारंभ: 3 अक्टूबर 2025, शाम 6:32 बजे
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द्वादशी तिथि समाप्त: 4 अक्टूबर 2025, शाम 5:09 बजे
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक
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राहुकाल: सुबह 9:13 से 10:41 बजे तक
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प्रदोष काल पूजा समय (शनि प्रदोष): सूर्यास्त के बाद
पद्मनाभ द्वादशी पूजा विधि
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प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
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भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
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उन्हें गंगाजल, रोली, चावल, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
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तुलसी पत्र और कमल पुष्प अर्पण करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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नैवेद्य और प्रसाद चढ़ाकर विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करें।
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शनि प्रदोष व्रत के लिए सायंकाल शिवलिंग की पूजा करें और तिल, तेल का दान करें।
पद्मनाभ द्वादशी का महत्व
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भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल से ब्रह्माजी का जन्म हुआ, इसलिए इसे पद्मनाभ द्वादशी कहते हैं।
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इस व्रत से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और धन-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
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शनि प्रदोष व्रत के पालन से ग्रह दोष और शनि दशा से मुक्ति मिलती है।
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यह तिथि नए कार्य, निवेश और व्यवसाय आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
लाभ
- धन-संपदा और समृद्धि की प्राप्ति
- जीवन की बाधाओं का निवारण
- शनि दोष और पितृ दोष से मुक्ति
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त
🙏 इस पद्मनाभ द्वादशी पर भगवान विष्णु की उपासना अवश्य करें और अपने जीवन से नकारात्मकता व बाधाओं को दूर करें। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाएं।
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