- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण और स्कंद पुराण में कहा गया है कि रविवार का व्रत करने से साधक को सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सूर्य पूजा का सही तरीका
व्रत करने वाले व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद पूजा स्थल को शुद्ध करना चाहिए।
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एक चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
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सूर्य देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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तांबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
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इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें या “ऊँ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
रविवार व्रत की विशेषता
यह व्रत शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू किया जा सकता है और 12 रविवार तक करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।
यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव
सर्वार्थ सिद्धि योग किसी विशिष्ट नक्षत्र और तिथि के योग से बनता है। इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति को कार्यसिद्धि की प्राप्ति होती है।
रविवार के उपाय
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गुड़ और तांबे का दान करें।
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लाल वस्त्र धारण करें।
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सूर्य देव को जल चढ़ाते समय मन में अपने लक्ष्य का संकल्प लें।
शुभ मुहूर्त (द्रिक पंचांग अनुसार)
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक
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राहुकाल: शाम 4:34 से 6:02 तक
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त्रयोदशी तिथि: 4 अक्टूबर शाम 5:09 से 5 अक्टूबर दोपहर 3:03 तक
अगर आप भी जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति चाहते हैं तो इस रविवार सूर्य देव की पूजा अवश्य करें।
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