- न्यूज मंत्रा लाइव इंटरनेशनल डेस्क
Physics Nobel Prize 2025: स्वीडन में फिजिक्स के नोबेल पुरस्कार 2025 की घोषणा हो गई है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार दोपहर 3:15 बजे बताया कि इस साल का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों — जॉन क्लार्क, माइकल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस — को दिया गया है।
इन तीनों वैज्ञानिकों को यह सम्मान क्वांटम मैकेनिज्म के प्रभावों को समझाने और उसे इलेक्ट्रिकल सर्किट में प्रदर्शित करने के लिए दिया गया है। उन्होंने एक ऐसे सर्किट का निर्माण किया, जिसमें पहली बार क्वांटम टनलिंग और क्वांटाइज्ड एनर्जी लेवल्स दोनों को “मैक्रोस्कोपिक स्तर” पर देखा गया।
🔹 क्या है इस खोज का महत्व?
यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम सेंसर और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों के विकास में मील का पत्थर मानी जा रही है। अब तक क्वांटम नियम केवल सूक्ष्म कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) पर लागू माने जाते थे, लेकिन इस प्रयोग ने यह साबित किया कि क्वांटम प्रभाव को बड़े पैमाने पर भी नियंत्रित और उपयोग किया जा सकता है।
🔹 इतिहास और भारतीय संबंध:
1901 से अब तक कुल 118 वैज्ञानिकों को फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
सबसे कम उम्र में यह सम्मान पाने वाले वैज्ञानिक लॉरेंस ब्रैग (25 वर्ष) थे, जबकि सबसे अधिक उम्र में आर्थर अश्किन (96 वर्ष) ने 2018 में इसे जीता।
भारत के पहले नोबेल विजेता सर सी.वी. रमन थे, जिन्हें 1930 में ‘रमन इफेक्ट’ की खोज के लिए यह सम्मान मिला। वहीं भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में तारों के जीवनचक्र की खोज के लिए यह पुरस्कार मिला।
🔹 पुरस्कार राशि और सम्मान समारोह:
नोबेल विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग ₹10.3 करोड़) की राशि, स्वर्ण पदक और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यह सम्मान समारोह 10 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम में आयोजित होगा।
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