- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
Thursday Worship : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस बार गुरुवार को पड़ रही है। ज्योतिष के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर धन, संतान और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।
आज के ग्रह-नक्षत्र और मुहूर्त
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सूर्य: कन्या राशि में
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चंद्रमा: रात 1:23 बजे तक मेष राशि में, उसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से 12:31 तक
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राहुकाल: दोपहर 1:36 से 3:03 तक
गुरुवार को कोई विशेष योग नहीं है, लेकिन यह दिन स्वयं में अत्यंत पवित्र और शुभ फल देने वाला होता है।
गुरुवार व्रत की विधि (Step-by-Step Process)
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ब्रह्म मुहूर्त में उठें: स्नान करके शरीर और मन को शुद्ध करें।
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पूजा स्थल की सफाई करें: गंगाजल छिड़कें और चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएँ।
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भगवान विष्णु की स्थापना करें: मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
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संकल्प लें: “मैं भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए गुरुवार व्रत का संकल्प लेता/लेती हूँ।”
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पूजन सामग्री चढ़ाएँ: हल्दी, चना दाल, गुड़, मुनक्का और पीले फूल चढ़ाएँ।
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केले के वृक्ष की पूजा करें: मान्यता है कि भगवान विष्णु का वास केले के पत्ते में होता है।
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कथा सुनें और आरती करें: भगवान बृहस्पति और विष्णु जी की आरती करें।
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दान करें: गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
व्रत की अवधि और उद्यापन
इस व्रत को किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से प्रारंभ कर सकते हैं।
लगातार 16 गुरुवार व्रत रखने के बाद उद्यापन किया जाता है। ऐसा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
आध्यात्मिक महत्व
अग्नि पुराण के अनुसार, गुरुवार के दिन भगवान विष्णु ने काशी में शिवलिंग की स्थापना की थी। इस कारण यह दिन विष्णु और शिव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है।
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