- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
Kartik Krishna Chaturthi 2025 : इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि बेहद खास है। शुक्रवार को एक साथ करवा चौथ, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी और मासिक कार्तिगाई दीपम का संगम बन रहा है। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जा रहा है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे।
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक
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राहुकाल: सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 तक
करवा चौथ व्रत का महत्व
कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र होता है।
इस दिन महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की आराधना की जाती है।
व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने और मिट्टी के करवा से जल अर्पित करने के बाद किया जाता है।
वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का पौराणिक महत्व
शुक्रवार को वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी भी है।
इस दिन भगवान गणेश के वक्रतुण्ड रूप की पूजा की जाती है — जिनकी सूंड टेढ़ी मानी जाती है।
मुद्गल पुराण के अनुसार, गणपति ने इस रूप में मत्सरासुर नामक दैत्य का वध किया था और बाद में उसे क्षमा कर जीवनदान दिया था।
इसलिए इस व्रत से विघ्न और संकटों से मुक्ति मिलती है।
मासिक कार्तिगाई दीपम का महात्म्य
कार्तिक महीने में जब कार्तिगाई नक्षत्र आता है, तब यह पर्व मनाया जाता है। इसे दक्षिण भारत में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।
यह दिन भगवान शिव और उनके पुत्र कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने स्वयं को अनंत ज्योति (दीप) में परिवर्तित किया था।
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलई मंदिर में इस अवसर पर महादीपम जलाया जाता है, जो दूर-दूर तक दिखाई देता है।
त्रिवेणी योग का धार्मिक महत्व
इस बार एक ही दिन तीन शक्तिशाली पर्वों का मिलन —
करवा चौथ (दांपत्य सुख), संकष्टी चतुर्थी (विघ्नों से मुक्ति) और कार्तिगाई दीपम (प्रकाश और शिव भक्ति) —
आध्यात्मिक रूप से एक त्रिवेणी योग बना रहा है, जो अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जा रहा है।
पूजा विधि और शुभ लाभ के उपाय
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सुबह स्नान के बाद भगवान शिव, गणेश और पार्वती की पूजा करें।
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निर्जला व्रत रखकर चंद्रोदय के समय अर्घ्य दें।
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दीपक जलाकर भगवान शिव को “अनंत ज्योति” अर्पित करें।
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व्रत कथा सुनें और दान में करवा (करक) दें।
इस साल की कार्तिक कृष्ण चतुर्थी न केवल श्रद्धा का पर्व है, बल्कि त्रिवेणी योग का प्रतीक भी है — जहाँ भक्ति, प्रेम और प्रकाश एक साथ जुड़ते हैं।
ऐसे शुभ संयोग में व्रत-पूजा से असीम पुण्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
🙏 इस दुर्लभ त्रिवेणी योग के पावन अवसर पर आप कौन-सा व्रत रख रहे हैं?
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