- न्यूज मंत्रा लाइव एस्ट्रो डेस्क
Vinayaki Chaturthi 2025 : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि इस बार शनिवार को पड़ रही है। इस दिन नागुला चविथी और विनायकी चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है।
द्रिक पंचांग के अनुसार —
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🌞 सूर्य तुला राशि में रहेंगे।
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🌙 चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे।
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🕚 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:27 तक
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☸️ राहुकाल: सुबह 9:17 से 10:41 तक
नागुला चविथी का महत्व और पूजा विधि
नागुला चविथी दक्षिण भारत में प्रमुखता से मनाई जाती है। यह पर्व नाग पंचमी के समान है जिसमें नाग देवता की पूजा अर्चना की जाती है।
इस दिन बारह विशिष्ट नागों की पूजा की जाती है — अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख, कुलिक, क्रौंच, धृतराष्ट्र, शेष और देवना।
👉 पूजन विधि:
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प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें।
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नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर हल्दी, कुंकुम और फूल अर्पित करें।
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दूध और शहद का नैवेद्य चढ़ाएं।
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“ॐ नागदेवताय नमः” मंत्र का जाप करें।
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सर्पों के प्रति दया भाव रखें और किसी जीव को नुकसान न पहुँचाएं।
विनायकी चतुर्थी (वरद विनायक चतुर्थी) की विधि और महत्व
इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से ग्रहबाधा, ऋण, और कष्ट से मुक्ति मिलती है।
पूजा विधि:
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ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें।
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गणेश प्रतिमा के समक्ष दुर्वा, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें।
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बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं —
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5 लड्डू ब्राह्मण को दान दें।
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5 लड्डू भगवान को अर्पित करें।
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शेष लड्डू प्रसाद रूप में वितरित करें।
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“ऊं गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
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श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष और संकटनाशक गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
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शाम के समय गाय को हरी दूर्वा या गुड़ खिलाएं।
चतुर्थी रात्रि में चंद्र अर्घ्य का महत्व
चतुर्थी की रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना गया है।
अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोलें —
“सिंहिका गर्भसंभूते चन्द्रमंडल सम्भवे।
अर्घ्यं गृहाण शंखेन मम दोषं विनाशय॥”
यह उपाय मानसिक शांति, ऋण मुक्ति और ग्रहदोष शमन के लिए अत्यंत प्रभावी है।
विशेष लाभ
- ग्रहबाधा और ऋण से मुक्ति
- ज्ञान और धैर्य में वृद्धि
- परिवार में सुख-शांति
- आर्थिक स्थिरता और समृद्धि
🙏 इस चतुर्थी भगवान गणेश और नाग देवता की पूजा कर अपने जीवन से नकारात्मकता दूर करें।
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