- न्यूज मंत्रा लाइव ब्यूरो
West Bengal TET Recruitment Judgment : पश्चिम बंगाल के 32,000 प्राथमिक शिक्षकों को बुधवार को बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने उस सिंगल जज बेंच के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें इन सभी शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया गया था।
डिविजन बेंच —
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न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती
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न्यायमूर्ति रितब्रत कुमार मित्रा
ने कहा कि हालांकि भर्ती प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएं थीं, लेकिन इतने वर्षों से सेवा दे रहे सभी शिक्षकों की नौकरी एक साथ खत्म करना न्यायसंगत नहीं है।
छह महीने चली सुनवाई, 12 नवंबर को रिजर्व हुआ था फैसला
करीब छह महीनों की लंबी सुनवाई के बाद बेंच ने 12 नवंबर को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। बुधवार दोपहर यह बहुप्रतीक्षित आदेश सुनाया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि—
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सभी उम्मीदवार एक जैसे नहीं हैं
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निर्दोष और पारदर्शी तरीके से चयनित उम्मीदवारों को दंडित नहीं किया जा सकता
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32,000 परिवारों पर नौकरी रद्द होने से गंभीर सामाजिक असर पड़ेगा
विस्तृत आदेश जल्द हाईकोर्ट वेबसाइट पर
डिविजन बेंच ने कहा कि फैसले की विस्तृत प्रति जल्द ही हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी, जिसमें—
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सभी कानूनी टिप्पणियाँ
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चयन प्रक्रिया से जुड़े विवरण
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और सिंगल बेंच के फैसले को पलटने के कारण
का विस्तार से उल्लेख होगा।
मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा — “सच की जीत हुई”
पश्चिम बंगाल सरकार में स्कूल और हायर एजुकेशन विभाग के मंत्री ब्रत्य बसु ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“32,000 प्राइमरी स्कूल टीचरों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित हैं।
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच का फैसला रद्द कर दिया गया है।
सच की जीत हुई है।”
उन्होंने प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को बधाई भी दी।
विवाद की जड़ : 2014 TET भर्ती प्रक्रिया
यह पूरा मामला 2014 की TET भर्ती से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने उस समय लगभग 42,500 शिक्षकों की नियुक्ति की थी।
कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि—
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भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ
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पैसे लेकर नियुक्तियां की गईं
इन आरोपों पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच (जस्टिस अभिजीत गांगुली) ने 12 मई 2023 को 32,000 नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था।
मामला डिविजन बेंच में कैसे पहुँचा?
राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के इस आदेश को चुनौती दी। मामला पहले—
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जस्टिस सौमेन सेन
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जस्टिस स्मिता दास दे
की बेंच के पास गया। लेकिन जस्टिस सेन ने स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया। इसके बाद केस को जस्टिस चक्रवर्ती और जस्टिस मित्रा की डिविजन बेंच को सौंपा गया, जिसने अब यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
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