- न्यूज मंत्रा लाइव हेल्थ डेस्क
Yoga and Pranayama : योग और प्राणायाम को अक्सर “सबके लिए समान” मान लिया जाता है, लेकिन चिकित्सकीय और योग विशेषज्ञों के अनुसार उम्र, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य-स्थिति के आधार पर अभ्यास बदलना जरूरी है। गलत या असंतुलित अभ्यास लाभ के बजाय नुकसान भी पहुँचा सकता है। यह रिपोर्ट उम्र-वार सुरक्षित योग और प्राणायाम पर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती है।
बच्चों (5–12 वर्ष) के लिए
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सुरक्षित अभ्यास: ताड़ासन, वृक्षासन, भ्रामरी प्राणायाम
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लाभ: एकाग्रता, श्वसन क्षमता और मानसिक संतुलन
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सावधानी: लंबी सांस रोकने वाले प्राणायाम (कुंभक) से बचें
किशोर और युवा (13–25 वर्ष)
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सुरक्षित अभ्यास: सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, कपालभाति (हल्का)
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लाभ: तनाव नियंत्रण, फिटनेस, हार्मोन संतुलन
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सावधानी: प्रतियोगी या अत्यधिक अभ्यास से बचें
प्रौढ़ (26–50 वर्ष)
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सुरक्षित अभ्यास: भुजंगासन, वज्रासन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी
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लाभ: पीठ-दर्द में राहत, रक्तचाप और तनाव नियंत्रण
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सावधानी: हृदय, मधुमेह या उच्च रक्तचाप में डॉक्टर की सलाह आवश्यक
बुजुर्ग (50+ वर्ष)
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सुरक्षित अभ्यास: कुर्सी योग, सूक्ष्म व्यायाम, गहरी श्वसन तकनीक
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लाभ: संतुलन, फेफड़ों की क्षमता और मानसिक शांति
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सावधानी: उल्टे आसन और तेज प्राणायाम से बचें
क्यों ज़रूरी है उम्र-अनुसार योग?
विशेषज्ञ मानते हैं कि उम्र के साथ मांसपेशियों, हड्डियों और श्वसन तंत्र की क्षमता बदलती है। इसलिए एक ही योग-अभ्यास सभी के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं होता।
योग शुरू करने से पहले प्रमाणित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से सलाह लें और उम्र-अनुसार सुरक्षित अभ्यास अपनाएँ।
Disclaimer : यह लेख सामान्य सूचना के लिए है। किसी भी योग या प्राणायाम को अपनाने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य-स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
Source : Ministry of AYUSH Yoga Guidelines, World Health Organization (WHO) physical activity recommendations
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