- न्यूज मंत्रा लाइव इंटरनेशनल डेस्क
Nepal Political Instability : नेपाल की राजनीति इन दिनों फिर एक बड़े संकट से जूझ रही है — पिछले कुछ महीनों में प्रधानमंत्री बदल चुके हैं और राजनीतिक अस्थिरता ने एक रिकॉर्ड मोड़ ले लिया है। 1990 के बाद से गठबंधन सरकारों की परंपरा, भ्रष्टाचार विरोधी युवाओं की सड़कों पर लुढ़कती नाराजगी और संवैधानिक जटिलताओं ने इस हिमालयी देश की राजनीति को अनिश्चितता के घेरे में फंसा दिया है।
नेपाल – राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास
नेपाल में 1990 के बाद से राजनीतिक दलों के बीच सत्ता संघर्ष जारी है, जहां किसी एक पार्टी को दीर्घकालीन बहुमत नहीं मिला है। इस वजह से गठबंधन सरकारें बनीं और टूटती रहीं, जिससे लगभग 26 प्रधानमंत्री और 20 से अधिक गठबंधन सरकारें कार्यरत रहीं।
मार्च 2024 से अब तक बदलते चेहरे
15 जुलाई 2024 को के. पी. शर्मा ओली ने चौथी बार प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला, लेकिन 8–9 सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए व्यापक प्रदर्शनों के बाद उन्हें सरकार छोड़नी पड़ी।
युवाओं की भूमिका और जेन-Z विरोध
नेपाल में सितंबर 2025 में शुरू हुए व्यापक “जेन-Z” विरोध प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध और रोजगार की कमी जैसे मुद्दों को उठाया। इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप ओली सरकार गिर गई और जल्द ही सुषिला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
संवैधानिक जटिलताएं
संविधान में अस्थिर सरकारों और अंतरिम प्रशासन की भूमिका स्पष्ट नहीं होने के कारण भी प्रधानमंत्री बदलने की प्रक्रिया तेजी से होती रही। चुनाव और विश्वास मत के मुद्दों पर राजनीतिक दल अनिश्चितता में रहते हैं, जिससे पूर्ण स्थिर सरकार बन पाना मुश्किल हो रहा है।
देश के भविष्य के संकेत
विश्लेषकों के अनुसार, 5 मार्च 2026 को प्रस्तावित संसदीय चुनाव स्थिर सरकार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन विरोध प्रदर्शनों के अंदरूनी विभाजन और स्पष्ट मांगों की कमी इसकी सफलता को प्रभावित कर सकती है।
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Disclaimer: यह लेख नवीनतम उपलब्ध समाचार, सरकारी जानकारी और स्वतंत्र विश्लेषण पर आधारित है। नेपाल के राजनीतिक मामलों में त्वरित बदलाव संभव हैं — तथ्यों की पुष्टि संबंधित सरकारी या आधिकारिक स्रोत से करना उचित है।
Source : ICWA
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