- न्यूज मंत्रा लाइव इंटरनेशनल डेस्क
Russia-Ukraine : 2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध का रन जारी है: रूस ने अपने नवीनतम हाइपरसोनिक ओरेश्निक मिसाइल का उपयोग करते हुए पश्चिमी यूक्रेन में बड़ा हमला किया है, जबकि यूक्रेनी सरकार यूएस सुरक्षा आश्वासनों पर अंतिम समझौते की कोशिश में जुटी है। इस बीच भारत भू-राजनीति के बढ़ते तनाव, व्यापार दबाव, ऊर्जा निर्भरता और रक्षा रणनीतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहा है।
युद्ध की मौजूदा स्थिति
रूस-यूक्रेन संघर्ष में कोई ठोस शांति नहीं बनी है — रूस ने पश्चिमी यूक्रेन में हाइपरसोनिक मिसाइल से ठोस लक्ष्य पर हमला किया है, जिसे मॉस्को ने यूक्रेन के ‘ड्रोन हमले’ के जवाब में बताया, लेकिन कीव और यूरोपीय देशों ने इसका खंडन किया है।
युद्ध के 1,418वें दिन भी लड़ाई जारी है और दोनों पक्ष भारी सैन्य और कूटनीतिक दबाव में हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को अमेरिका की ओर से सुरक्षा गारंटी मिल सकती है, जिसे संयुक्त समझौते की दिशा में देखा जा रहा है।
भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव
अर्थव्यवस्था और व्यापार दबाव
• रूस यूरोप और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपनी ऊर्जा निर्यात में सक्रिय है — दिसंबर 2025 में भारत रूस का तीसरा सबसे बड़ा ख़रीददार बना, खासकर कच्चे तेल और कोयले में। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई, लेकिन पश्चिमी देशों द्वारा टैरीफ और व्यापार दबाव बढ़ने की आशंका भी है।
• अमेरिका की हालिया रूस विरोधी नीतियों में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि वह रूसी तेल पर निर्भर बना रहता है तो उसपर 500% तक के टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर तनाव बढ़ सकता है।
सैन्य और कूटनीतिक चुनौतियाँ
भारत ने पारंपरिक रूप से रूस से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदे हैं; इसके अलावा भारत-यूक्रेन ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति पर भी काम कर रहा है, जिससे दोनों देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
वैश्विक सुरक्षा और रक्षा बजट
वैश्विक तनाव के बीच भारत में रक्षा बजट पर भी बहस तेज़ है; बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों के कारण युद्ध-आधारित जोखिमों को ध्यान में रखा जा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और रणनीति
-
अमेरिका-रूस तनाव: रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते द्विपक्षीय तनाव से वैश्विक शक्ति संतुलन पर दबाव बना हुआ है — इससे कई देशों को रणनीतिक सहमति चुनने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
-
BRICS पहल: ब्रिक्स देशों के कुछ सदस्य संयुक्त समुद्री अभ्यासों में शामिल हैं, लेकिन भारत ने इन सैन्य अभ्यासों से दूरी बनाई है, जिससे उसकी संतुलित नीति बरकरार रही है।
👉 हमारी न्यूजलेटर्स के लिए साइन अप करें — ताज़ा वैश्विक और भारत-केंद्रित युद्ध व सुरक्षा समाचार सीधे आपके फ़ोन पर!
Disclaimer : यह लेख उपलब्ध स्रोतों और भरोसेमंद मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। राजनीतिक, सैन्य तथा आर्थिक स्थितियाँ समय के साथ बदल सकती हैं।
Source : Eurasian Research, Al Jazeera, The Guardian, Centre for Research on Energy and Clean Air:
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
