- न्यूज मंत्रा लाइव नेशनल डेस्क
Gig Workers Salary : भारत में Gig Economy तेज़ी से विस्तार कर रही है। फूड डिलीवरी, कैब सर्विस, ई-कॉमर्स, कंटेंट और फ्रीलांस प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों Gig Workers हर महीने कमाई कर रहे हैं। लेकिन सरकार के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इन श्रमिकों की सैलरी के बावजूद सामाजिक सुरक्षा—जैसे पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस और जॉब सिक्योरिटी—अब भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है।
Gig Economy क्या है और इसका फैलाव
Gig Economy वह कार्य व्यवस्था है जिसमें कर्मचारी स्थायी नहीं होते, बल्कि प्रोजेक्ट या टास्क आधारित काम करते हैं। भारत में यह मॉडल तेजी से बढ़ा है, खासकर शहरी युवाओं और अर्ध-शहरी श्रमिकों के बीच।
सरकारी आकलन के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने रोजगार के नए अवसर तो पैदा किए हैं, लेकिन पारंपरिक श्रम सुरक्षा ढांचे से बाहर एक बड़ा वर्ग खड़ा कर दिया है।
सरकार के नए डेटा में क्या सामने आया
नीति आयोग और श्रम मंत्रालय से जुड़े हालिया अध्ययनों के मुताबिक:
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अधिकांश Gig Workers को न्यूनतम मासिक आय तो मिल रही है
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लेकिन Provident Fund (PF), ESI, पेड लीव जैसी सुविधाएँ नहीं
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कार्य घंटे तय नहीं, आय अस्थिर
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दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में व्यक्तिगत खर्च
यह डेटा बताता है कि Gig Workers को “कमाने वाला” तो माना जा रहा है, लेकिन “संरक्षित श्रमिक” नहीं।
Social Security क्यों अहम है
Gig Workers सड़क पर, मौसम में, जोखिम भरे हालात में काम करते हैं। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा न होने का सीधा असर उनके और उनके परिवार के भविष्य पर पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति शहरी गरीबों का नया रूप पैदा कर सकती है—जहाँ व्यक्ति काम करता है, लेकिन सुरक्षा के बिना।
प्रमुख तथ्य
- भारत में Gig Workers की संख्या करोड़ों में
- अधिकांश 18–35 आयु वर्ग के
- असंगठित श्रम कानूनों के तहत सीमित संरक्षण
- आय पर टैक्स/कटौती, लेकिन सामाजिक लाभ नहीं
Gig Economy का विकास
- 2015–2018: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उदय
- 2020: महामारी में Gig Work की तेज़ बढ़त
- 2023–2025: सरकार द्वारा डेटा संग्रह और नीति चर्चा
- वर्तमान: Social Security Framework पर बहस जारी
क्या Gig Workers को कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए? क्या Social Security को प्लेटफॉर्म की ज़िम्मेदारी बनाया जाना चाहिए? अपनी राय साझा करें और इस मुद्दे को नीति बहस का हिस्सा बनाएं।
Disclaimer : यह रिपोर्ट सार्वजनिक सरकारी डेटा, नीति दस्तावेज़ों और विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य सूचना देना है, न कि किसी व्यक्ति या संस्था के पक्ष या विपक्ष में राय बनाना।
Source :
- Ministry of Labour and Employment – Unorganized Labour Data
- NITI Aayog – Gig & Platform Economy Report
- E-Shram portal registration data
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