- न्यूज मंत्रा लाइव ब्यूरो
Hyderabad Lakes : आईटी और स्टार्टअप हब के रूप में पहचाना जाने वाला हैदराबाद आज एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। कभी झीलों का शहर कहलाने वाला यह महानगर अब उन्हीं जलस्रोतों को खोता जा रहा है, जिन्होंने सदियों तक इसकी जल-सुरक्षा और जलवायु संतुलन बनाए रखा।
झीलों का शहर, जो कंक्रीट में डूब गया
हैदराबाद के आसपास कभी 700 से ज़्यादा झीलें थीं। आज आधिकारिक रिकॉर्ड में इनकी संख्या आधी से भी कम मानी जाती है। शहरी विस्तार, रियल एस्टेट और सड़कों ने झीलों के कैचमेंट एरिया निगल लिए।
स्टार्टअप बूम बनाम जलस्रोत
आईटी पार्क, को-वर्किंग स्पेस और हाई-राइज़ अपार्टमेंट्स ने रोजगार तो दिया, लेकिन झीलों के लिए जगह नहीं छोड़ी। दुर्गम चेरुवु जैसी झीलें आज “अर्बन लेक” बनकर सिर्फ़ सजावटी रह गई हैं।
सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण
शहर का बड़ा हिस्सा बिना ट्रीटमेंट के सीवेज को झीलों में छोड़ता है। हुसैन सागर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ झील अब प्राकृतिक जलाशय से ज़्यादा एक वेस्टवॉटर बॉडी बन चुकी है।
जलवायु और स्वास्थ्य पर असर
झीलें सिर्फ़ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि तापमान नियंत्रक भी हैं। इनके सूखने से हीट आइलैंड इफेक्ट बढ़ रहा है और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी।
Facts :
▪ झीलों की संख्या
- 1960 के दशक में: 700+
- वर्तमान में सक्रिय: अनुमानतः 300 से कम
▪ प्रमुख प्रभावित झीलें
- हुसैन सागर
- उस्मान सागर
- हिमायत सागर
Timeline :
- 1560–1700 : कुतुबशाही काल में झीलों का निर्माण – जल प्रबंधन का आधार
- 1995–2010 : आईटी सेक्टर का तेज़ विस्तार – झीलों पर दबाव
- 2015–अब तक : स्टार्टअप बूम + रियल एस्टेट ग्रोथ – इकोलॉजी संकट गहराया
शहर का विकास ज़रूरी है, लेकिन क्या बिना झीलों के “स्मार्ट सिटी” संभव है? अपनी राय कमेंट में दें और इस रिपोर्ट को शेयर करें।
Disclaimer : यह रिपोर्ट सार्वजनिक डेटा, पर्यावरणीय अध्ययनों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी संस्था या परियोजना को बदनाम करने का उद्देश्य नहीं।
Source :
- Telangana State Pollution Control Board – Lake Water Quality Report
- Centre for Environmental Studies, Hyderabad
- Public documents of the State Water Resources Department
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