- न्यूज मंत्रा लाइव बिजनेस डेस्क
MSME challenges in small cities : भारत सरकार ने 2026 तक देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत MSME क्षेत्र को ₹23,168 करोड़ का बजट आवंटन मिला है, लेकिन एक बड़ा सवाल आज भी बना हुआ है: क्या यह लाभ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की गलियों तक पहुँच रहा है? ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत के 51% से अधिक MSME छोटे शहरों में स्थित हैं, फिर भी बुनियादी सुविधाओं और तकनीक के अभाव में वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।
वित्त तक पहुँच और ऋण की जटिलता
भले ही सरकार ने ‘यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस’ (ULI) और ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड पेश किया हो, लेकिन छोटे शहरों के उद्यमियों के लिए आज भी बैंक से ऋण लेना एक टेढ़ी खीर है। सिडबी (SIDBI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी ₹30 लाख करोड़ का ‘क्रेडिट गैप’ मौजूद है।
तकनीक और डिजिटल साक्षरता की कमी
महानगरों में AI और ऑटोमेशन की बात हो रही है, जबकि छोटे शहरों के MSME आज भी पुरानी मशीनरी पर निर्भर हैं। ‘डिजिटल MSME 2.0’ जैसी योजनाओं के बावजूद, केवल 30% लघु उद्योगों ने ही डिजिटल समाधानों को पूरी तरह अपनाया है।
लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा
छोटे शहरों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और खराब सड़क संपर्क उत्पादन लागत को 15-20% तक बढ़ा देते हैं। समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का लाभ अभी भी दूरदराज के क्लस्टर्स तक उस गति से नहीं पहुँचा है जिसकी उम्मीद थी।
अनुपालन का बोझ (Compliance Burden)
एक छोटे उद्यमी के लिए जीएसटी (GST), श्रम कानून और पर्यावरणीय मानकों को समझना और उनका पालन करना किसी दुःस्वप्न जैसा है। बजट 2026 में ‘कॉर्पोरेट मित्र’ की घोषणा इसी बोझ को कम करने के लिए की गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य (Fact)
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पंजीकरण: नवंबर 2025 तक उद्यम पोर्टल पर 7.16 करोड़ MSME पंजीकृत हैं, जिनमें से 95% ‘सूक्ष्म’ (Micro) श्रेणी के हैं।
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भुगतान में देरी: सरकारी विभागों और बड़ी कंपनियों द्वारा भुगतान में देरी के कारण MSME का लगभग ₹10.7 लाख करोड़ फंसा हुआ है।
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औपचारिकता: लगभग 86% विनिर्माण MSME अभी भी असंगठित क्षेत्र में हैं, जिससे वे सरकारी सब्सिडी से वंचित रह जाते हैं।
टाइमलाइन (Time Line)
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2014: ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत।
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2020: MSME की परिभाषा में ऐतिहासिक बदलाव और ‘उद्यम’ पोर्टल का शुभारंभ।
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2024-25: बजट में MSME के लिए ऋण गारंटी योजना का विस्तार।
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2026 (वर्तमान): बजट में ‘SME चैंपियंस’ बनाने के लिए ₹2,000 करोड़ के अतिरिक्त फंड की घोषणा और ‘कॉर्पोरेट मित्र’ की नियुक्ति।
आगे की राह
यदि आप एक छोटे शहर के उद्यमी हैं, तो अपनी इकाई को उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत करें और ‘कॉर्पोरेट मित्र’ जैसी सरकारी सेवाओं का लाभ उठाएं। क्या आपको भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ रही है? हमें कमेंट में बताएं।
डिसक्लेमर
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट (msme.gov.in) पर नियमों और शर्तों की जांच अवश्य करें।
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