- न्यूज मंत्रा लाइव नेशनल डेस्क
Atomic Energy India 2026 : भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नेट-ज़ीरो (Net-Zero) लक्ष्यों की दिशा में एक साहसिक कदम उठाते हुए ‘SHANTI Act’ (Strategic Harnessing of Advanced Nuclear Technologies for India) को प्रभावी बनाया है। दशकों से सरकारी नियंत्रण में रहे परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को अब निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है। यह कानून न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि आधुनिक मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के निर्माण में निवेश को भी आकर्षित करेगा। लेकिन, क्या निजी भागीदारी सुरक्षा मानकों से समझौता करेगी? यह एक बड़ा प्रश्न है।
निजी भागीदारी और दूरगामी प्रभाव
ऊर्जा उत्पादन में तेजी
वर्तमान में भारत की कुल बिजली क्षमता में परमाणु ऊर्जा का योगदान 3% से भी कम है। SHANTI Act के माध्यम से निजी पूंजी आने से परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण की गति तेज होगी, जिससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी।
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) का उदय
यह कानून निजी क्षेत्र को छोटे और आधुनिक रिएक्टरों को विकसित करने की अनुमति देता है। ये रिएक्टर कम जगह लेते हैं और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
सुरक्षा और नियामक ढांचा
निजी क्षेत्र के प्रवेश के साथ ही Atomic Energy Regulatory Board (AERB) की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। कानून में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और ‘लायबिलिटी क्लॉज’ शामिल किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
महत्वपूर्ण तथ्य
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निजी निवेश सीमा: कानून के तहत रणनीतिक संयंत्रों में सरकारी हिस्सेदारी अनिवार्य है, जबकि बिजली उत्पादन इकाइयों में निजी निवेश को लचीलापन दिया गया है।
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सुरक्षा मानक: सभी निजी संयंत्रों का संचालन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों के अधीन होगा।
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लक्ष्य: भारत का लक्ष्य 2031 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 22,480 मेगावाट तक ले जाना है।
परमाणु नीति का सफर
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1948: परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) की स्थापना।
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1962: परमाणु ऊर्जा अधिनियम पारित (पूरी तरह सरकारी नियंत्रण)।
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2008: भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (NSG छूट)।
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2024-25: SHANTI Act का प्रस्ताव और संसद में चर्चा।
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2026: कानून का क्रियान्वयन और निजी भागीदारी की औपचारिक शुरुआत।
परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र का प्रवेश भारत के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है, बशर्ते सुरक्षा और कचरा प्रबंधन (Waste Management) के साथ कोई समझौता न हो।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध विधायी दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों के विश्लेषण पर आधारित है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की संवेदनशील प्रकृति के कारण सुरक्षा नीतियों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।
Source :
- Ministry of External Affairs (MEA):
- Department of Atomic Energy (DAE):
- IAEA Guidelines:
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