- न्यूज मंत्रा लाइव ब्यूरो
Naseemuddin Siddiqui : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल की आहट है। बसपा के पूर्व ‘चाणक्य’ और हाल ही में कांग्रेस को अलविदा कहने वाले दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थामने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 15 फरवरी को लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान वह औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता लेंगे। सिद्दीकी का यह कदम न केवल बुंदेलखंड बल्कि पश्चिमी यूपी के मुस्लिम और दलित समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
क्या ‘साइकिल’ को मिलेगी सिद्दीकी की रफ़्तार?
कांग्रेस से मोहभंग और सपा की ओर झुकाव
करीब आठ साल तक कांग्रेस में रहने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में उन्हें ज़मीनी स्तर पर काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था। राजनीति के जानकारों का मानना है कि सिद्दीकी काफी समय से उपेक्षित महसूस कर रहे थे और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वह एक ऐसी ज़मीन की तलाश में थे जहाँ उनका सियासी कद फिर से स्थापित हो सके।
सपा के लिए ‘मुस्लिम चेहरे’ की भरपाई
आजम खान के जेल जाने और सक्रिय राजनीति से दूरी के बाद, समाजवादी पार्टी को एक ऐसे कद्दावर मुस्लिम चेहरे की तलाश थी जिसकी पकड़ पूरे प्रदेश में हो। नसीमुद्दीन सिद्दीकी, जो कभी मायावती सरकार में ‘नंबर दो’ की हैसियत रखते थे, सपा के लिए उस कमी को पूरा कर सकते हैं। उनके आने से सपा को न केवल मुस्लिम वोटों को एकजुट करने में मदद मिलेगी, बल्कि बसपा के कैडर वोट बैंक में भी सेंधमारी की उम्मीद जगी है।
महत्वपूर्ण बातें
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दबदबा: नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती सरकार में लोक निर्माण (PWD), आबकारी और सिंचाई जैसे 50 से अधिक विभागों के मंत्री रह चुके हैं।
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जनाधार: बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिमी यूपी के जिलों में उनका खासा प्रभाव माना जाता है।
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इस्तीफा: जनवरी 2026 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी, जिसके साथ उनके करीब 73 समर्थकों ने भी पार्टी से इस्तीफा दिया।
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रणनीति: 2027 के चुनावों के लिए सपा ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर काम कर रही है, जिसमें सिद्दीकी की भूमिका अहम हो सकती है।
राजनीतिक घटनाक्रम
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1991: बांदा से पहली बार विधायक चुने गए।
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1997-2012: बसपा सरकारों में कैबिनेट मंत्री के रूप में शक्तिशाली उदय।
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मई 2017: मायावती ने अनुशासनहीनता के आरोप में बसपा से निष्कासित किया।
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फरवरी 2018: समर्थकों के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।
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जनवरी 2026: कांग्रेस की कार्यशैली से नाराज़ होकर इस्तीफा दिया।
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फरवरी 2026: समाजवादी पार्टी में शामिल होने की प्रबल संभावना (संभावित तिथि: 15 फरवरी)।
आगामी राह
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में जाना यूपी की त्रिकोणीय राजनीति (BJP, SP, BSP) को दो ध्रुवीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। यदि वह दलित और मुस्लिम वोटों का सफल गठजोड़ बनाने में कामयाब रहते हैं, तो 2027 की राह अखिलेश यादव के लिए आसान हो सकती है।
Disclaimer: यह समाचार वर्तमान राजनीतिक हलचलों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक घोषणा पार्टी मुख्यालय द्वारा की जाएगी।
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