- न्यूज मंत्रा लाइव वायरल डेस्क
Quick Highlights
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सरकार की तैयारी: आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘एज-बेस्ड रेस्ट्रिक्शन’ (उम्र आधारित प्रतिबंध) पर गंभीरता से विचार कर रही है।
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वैश्विक रुख: ऑस्ट्रेलिया (16 साल) और फ्रांस जैसे देशों के कदमों के बाद भारत में भी इसी तरह के कड़े कानूनों की मांग बढ़ी है।
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बड़ी कंपनियों को चेतावनी: मेटा, यूट्यूब, एक्स और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को भारतीय संविधान और कानूनी ढांचे का पालन करना अनिवार्य होगा।
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डीपफेक का खतरा: मंत्री ने बच्चों को डीपफेक और ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट से बचाने के लिए सख्त नियामक उपायों की आवश्यकता जताई।
Child Online Safety : डिजिटल इंडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच, बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हालिया बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है कि क्या भारत भी ऑस्ट्रेलिया की तरह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाने की ओर बढ़ रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि ‘डिजिटल लत’ और ‘डीपफेक’ के दौर में बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
आईटी मंत्री का बड़ा बयान: क्या है सरकार का इरादा?
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान अश्विनी वैष्णव ने वैश्विक पत्रकारों से बात करते हुए संकेत दिए कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ उम्र-आधारित प्रतिबंधों (Age-based restrictions) पर बातचीत कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई देशों ने अब यह स्वीकार कर लिया है कि बच्चों के लिए इंटरनेट को पूरी तरह खुला छोड़ना जोखिम भरा है।
DPDP एक्ट और कानूनी ढांचा
भारत ने पहले ही डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के माध्यम से 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के डेटा प्रोसेसिंग के लिए ‘वेरिएबल पैरेंटल कंसेंट’ (माता-पिता की अनिवार्य सहमति) का प्रावधान किया है। मंत्री ने कहा कि अब इसे प्रभावी ढंग से लागू करने और उम्र के सत्यापन (Age Verification) के नए तरीके खोजने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्लोबल ट्रेंड और भारत की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत में भी मद्रास उच्च न्यायालय जैसी संस्थाओं ने इसी तरह के कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है। हालांकि, विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय ‘सेफ मोड’ और ‘पैरेंटल कंट्रोल’ अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
“मल्टीनेशनल कंपनियों को भारत के सांस्कृतिक संदर्भ और कानूनी ढांचे का सम्मान करना होगा। जो दूसरे देशों में सामान्य हो सकता है, वह हमारे समाज और बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है।” — अश्विनी वैष्णव, आईटी मंत्री
Key points
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सत्यता: क्या भारत ने बैन लगा दिया है? नहीं, वर्तमान में सरकार केवल विचार-विमर्श (Consultation) और नियम बनाने की प्रक्रिया में है।
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कानूनी आधार: DPDP एक्ट 2023 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति पहले से ही एक अनिवार्य हिस्सा है।
Chronology
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अगस्त 2023: DPDP एक्ट को संसद की मंजूरी मिली।
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जनवरी 2026: आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में बच्चों के लिए उम्र आधारित डिजिटल नियमों की सिफारिश की गई।
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फरवरी 2026: आईटी मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ ‘एज-गेटिंग’ चर्चा की पुष्टि की।
क्या आपको लगता है कि भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बंद होना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में बताएं।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और सरकारी बयानों पर आधारित है। अंतिम नीतिगत निर्णय भारत सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Gazette) के माध्यम से घोषित किया जाएगा।
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