- न्यूज मंत्रा लाइव नेशनल डेस्क
Quick Highlights
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स्पेक्ट्रम आवंटन: सरकार ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए प्रशासनिक आवंटन (Administrative Allocation) का मार्ग प्रशस्त किया।
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अंतिम छोर तक पहुंच: हिमालयी क्षेत्रों और दूरदराज के द्वीपों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना मुख्य लक्ष्य।
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वैश्विक खिलाड़ी: स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो-एसईएस के बीच प्रतिस्पर्धा तेज।
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लागत में कमी: नई नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में डेटा की कीमतों में गिरावट की संभावना।
Satellite Internet Policy India : भारत सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया 2.0’ के विजन को साकार करने के लिए अपनी नई सैटेलाइट इंटरनेट पॉलिसी के साथ एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह नीति केवल तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि उस अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के बारे में है जो भौगोलिक बाधाओं के कारण अब तक ऑफलाइन था।
सैटेलाइट इंटरनेट: ग्रामीण कनेक्टिविटी का नया युग
पारंपरिक फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाना पहाड़ों और घने जंगलों में न केवल महंगा है बल्कि चुनौतीपूर्ण भी है। नई नीति के तहत, Low Earth Orbit (LEO) सैटेलाइट्स का उपयोग किया जाएगा, जो जमीन से मात्र 500 से 2,000 किमी की ऊंचाई पर होते हैं। इससे ‘लेटेंसी’ (डेटा देरी) कम होती है और वीडियो कॉलिंग व ऑनलाइन शिक्षा सुगम हो जाती है।
प्रशासनिक आवंटन बनाम नीलामी
पॉलिसी का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु स्पेक्ट्रम का आवंटन है। अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए, भारत ने नीलामी के बजाय प्रशासनिक आवंटन को चुना है। यह कदम वैश्विक ऑपरेटरों के लिए भारत में निवेश करना आसान बनाएगा, जिससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को सस्ती सेवाएं मिल सकेंगी।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह नीति कृषि-तकनीक (Agri-tech), टेली-मेडिसिन और ग्रामीण ई-कॉमर्स के लिए नए द्वार खोलेगी। जब एक दूरस्थ गांव का किसान वास्तविक समय में वैश्विक बाजार की कीमतें देख पाएगा, तभी डिजिटल इंडिया का सपना पूर्ण होगा।
डिजिटल भारत का सफर
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2015: डिजिटल इंडिया मिशन का शुभारंभ।
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2023: नई अंतरिक्ष नीति (Space Policy) को मंजूरी।
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2025-26: सैटेलाइट स्पेक्ट्रम दिशा-निर्देशों का कार्यान्वयन और कमर्शियल रोलआउट।
Facts
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कनेक्टिविटी गैप: वर्तमान में भारत के लगभग 25,000 गांवों में अभी भी स्थिर मोबाइल कनेक्टिविटी का अभाव है।
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बाजार क्षमता: एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सैटेलाइट संचार बाजार 2030 तक $13 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
क्या आपको लगता है कि सैटेलाइट इंटरनेट फाइबर ब्रॉडबैंड की जगह ले पाएगा? नीचे कमेंट्स में अपनी राय साझा करें और इस रिपोर्ट को शेयर करें।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और वर्तमान नीतिगत चर्चाओं पर आधारित है। स्पेक्ट्रम की दरें और कार्यान्वयन की समयसीमा सरकारी अधिसूचनाओं के अधीन हैं।
Sources :
- PIB India:
- DoT (Department of Telecommunications):
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