- न्यूज मंत्रा लाइव ब्यूरो
Quick Highlights
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नया मॉडल: ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर आधारित एकीकृत ढांचा।
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विस्तार: ‘PM e-Bus सेवा’ के तहत 10,000+ नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने का लक्ष्य।
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बजट 2026: बैटरी निर्माण और चार्जिंग स्टेशनों के लिए विशेष आवंटन।
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आम जनता को लाभ: यात्रा खर्च में कमी, कम प्रदूषण और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी।
Smart City India : भारत के स्मार्ट सिटी मिशन ने 2026 में एक नए ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ युग में प्रवेश कर लिया है। सरकार का मुख्य ध्यान अब केवल सड़कों के निर्माण पर नहीं, बल्कि एक ऐसे इकोसिस्टम पर है जो पर्यावरण के अनुकूल हो। अत्याधुनिक PM e-DRIVE योजना और TOD (Transit-Oriented Development) के माध्यम से, प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह डिजिटल और इलेक्ट्रिक बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसका सीधा उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और शहरों की हवा को स्वच्छ बनाना है।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल: एक एकीकृत दृष्टिकोण
नया मॉडल केवल इलेक्ट्रिक बसों तक सीमित नहीं है। यह मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी पर केंद्रित है, जहाँ मेट्रो, बस और साइकिल ट्रैक को एक साथ जोड़ा जा रहा है। 2026 के बजट में दिए गए ‘इन्फ्रा पुश’ के कारण अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ‘जीरो-एमिशन’ जोन बनाए जा रहे हैं।
आम जनता पर सकारात्मक प्रभाव
इस मॉडल के लागू होने से नागरिकों के जीवन में तीन बड़े बदलाव आएंगे:
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किफायती सफर: नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के जरिए बस और मेट्रो में एक ही कार्ड से भुगतान संभव होगा, जिससे समय और पैसा दोनों बचेंगे।
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स्वच्छ वातावरण: प्रदूषण में कमी आने से श्वसन संबंधी बीमारियों के जोखिम में गिरावट आने की उम्मीद है।
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आधुनिक सुविधा: इन इलेक्ट्रिक बसों में ‘इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) होगा, जिससे यात्री मोबाइल ऐप पर बस की सटीक लोकेशन देख सकेंगे।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी बाधा रही है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने 72,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी को भी सरल बनाया गया है ताकि वाणिज्यिक वाहनों को रुकना न पड़े।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की विकास यात्रा
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2015-2016: स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत और शुरुआती परिवहन योजनाएं।
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2024: PM-eBus सेवा और PM e-DRIVE योजनाओं का अनुमोदन।
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जनवरी 2026: 22 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का रिकॉर्ड।
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फरवरी 2026: बजट में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए सीमा शुल्क में छूट और नए ‘लो एमिशन जोन’ की घोषणा।
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मार्च 2026 (आगामी): नई दिल्ली में ‘स्मार्ट फ्यूचर सिटीज इंडिया एक्सपो’ का आयोजन।
आंकड़े और प्रमाण
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लक्ष्य 2030: भारत का लक्ष्य 2030 तक 30% EV पेनिट्रेशन हासिल करना है।
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कार्बन उत्सर्जन: ग्रीन मोबिलिटी के जरिए परिवहन क्षेत्र के उत्सर्जन में 20-30% की कमी लाने का अनुमान है।
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बजट आवंटन: PM e-Bus सेवा के लिए ₹57,613 करोड़ का कुल अनुमानित व्यय।
क्या आपके शहर में ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल लागू हो गया है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में साझा करें या इस लेख को शेयर करें।
Disclaimer: यह रिपोर्ट वर्तमान सरकारी नीतियों और 2026 के बजटीय प्रावधानों पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन की गति अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है।
Sources :
- PIB India
- NITI Aayog
- Smart Cities India
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