- न्यूज मंत्रा लाइव नेशनल डेस्क
Quick View
-
कुल बजट: ₹5,083 करोड़ के रक्षा सौदे पर अंतिम मुहर।
-
ALH हेलीकॉप्टर: HAL के साथ 6 ‘एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर’ के लिए अनुबंध।
-
Shtil मिसाइलें: रूस के साथ समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मिसाइल सौदा।
-
लाभार्थी: भारतीय नौसेना (Indian Navy) और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard)।
-
विजन: ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा।
Maritime Security : भारत ने अपनी समुद्री सीमाओं की अभेद्य किलेबंदी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस के साथ कुल ₹5,083 करोड़ के दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम न केवल भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ के संकल्प को भी नई ऊंचाई देगा।
स्वदेशी शक्ति: 6 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH)
इस सौदे का एक बड़ा हिस्सा HAL के साथ हुआ है, जिसके तहत 6 नए एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH Mk-III) का निर्माण किया जाएगा। ये हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक सेंसर और हथियारों से लैस होंगे, जो समुद्री निगरानी, खोज और बचाव (SAR) अभियानों में गेम-चेंजर साबित होंगे। इनका उपयोग मुख्य रूप से कोस्ट गार्ड द्वारा भारतीय तटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।
Shtil मिसाइलें: नौसेना की मारक क्षमता में इजाफा
समुद्री युद्धक क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने रूस के साथ ‘Shtil’ सरफेस-टू-एयर मिसाइलों के लिए भी समझौता किया है। ये मिसाइलें भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात की जाएंगी, जो दुश्मन के हवाई खतरों (मिसाइल और विमान) को सटीक तरीके से नष्ट करने में सक्षम हैं।
रणनीतिक महत्व और ‘मेक इन इंडिया’
यह रक्षा सौदा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की उपस्थिति को सशक्त बनाता है। ‘स्वदेशी प्रहार’ का यह न्यूज़ एंगल दर्शाता है कि भारत अब आयात पर निर्भरता कम कर अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन इकाइयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहा है।
Fact
-
HAL ALH Mk-III: यह 5.5 टन श्रेणी का बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर है।
-
Shtil-1: यह एक मीडियम रेंज मिसाइल सिस्टम है जो 3D रडार और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स से लैस है।
-
रोजगार: इस सौदे से देश के एयरोस्पेस सेक्टर में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
रक्षा सौदे की प्रक्रिया
-
प्रारंभिक प्रस्ताव: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा आवश्यकता की स्वीकृति (AoN)।
-
वार्ता चरण: HAL और रूसी मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) के साथ मूल्य निर्धारण पर चर्चा।
-
मार्च 2026: रक्षा मंत्रालय द्वारा आधिकारिक रूप से अनुबंध पर हस्ताक्षर।
-
आगामी लक्ष्य: 2027 के मध्य से हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू होने की संभावना।
रक्षा क्षेत्र में भारत की इस बड़ी छलांग पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट्स में बताएं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट आधिकारिक सरकारी घोषणाओं और सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित है। अनुबंध की शर्तें सुरक्षा कारणों से आंशिक रूप से गोपनीय हो सकती हैं।
Source :
- Ministry of Defence (MoD)
- PIB India
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
