- न्यूज मंत्रा लाइव फैक्ट चेक डेस्क
Quick View
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सोशल मीडिया पर पूर्व सेना प्रमुख का कथित विवादित बयान दिखाने वाला वीडियो वायरल।
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सरकारी फैक्ट-चेक इकाई ने बताया — वीडियो AI-जनरेटेड डीपफेक है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में डीपफेक प्रोपेगेंडा और सूचना युद्ध की चिंता बढ़ी।
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विशेषज्ञों ने कहा — ऐसे वीडियो लोकतांत्रिक संस्थाओं और सेना की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
Viral video fact check : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें भारत के पूर्व सेना प्रमुख को कथित तौर पर विवादित टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है। दावा किया गया कि यह वीडियो हाल ही में रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि सरकारी फैक्ट-चेक इकाई की जांच में सामने आया कि यह वीडियो AI तकनीक से बनाया गया डीपफेक है और भ्रामक दावों के साथ ऑनलाइन फैलाया जा रहा है। यह वीडियो अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया गया और कई यूज़र्स ने इसे वास्तविक मानकर प्रसारित किया।
वायरल वीडियो और दावा
फेसबुक, एक्स (X), व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को पूर्व सेना प्रमुख जैसा दिखने और बोलने के साथ विवादित टिप्पणी करते हुए दिखाया गया।
पोस्ट्स में दावा किया गया कि यह बयान हाल के राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से जुड़ा है।
लेकिन वीडियो के कई फ्रेम और ऑडियो पैटर्न की जांच करने पर पता चला कि चेहरे की मूवमेंट और आवाज़ सिंथेटिक तकनीक से बनाई गई थी।
सरकारी फैक्ट-चेक का खुलासा
सरकारी फैक्ट-चेक इकाई ने जांच के बाद इस वीडियो को AI-जनरेटेड डीपफेक बताया।
एक आधिकारिक चेतावनी में कहा गया:
“सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा यह वीडियो वास्तविक नहीं है। यह AI तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया गया डीपफेक है और लोगों को भ्रमित करने के उद्देश्य से फैलाया गया है।”
सरकार ने नागरिकों से अपील की कि ऐसे वीडियो को बिना सत्यापन शेयर न करें।
आप भी देखें :
राष्ट्रीय सुरक्षा और सूचना युद्ध
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के डीपफेक वीडियो सूचना युद्ध (Information Warfare) का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
इनका उद्देश्य अक्सर:
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सार्वजनिक भ्रम पैदा करना
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सेना या सरकारी संस्थाओं की छवि प्रभावित करना
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राजनीतिक या सामाजिक तनाव बढ़ाना
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित डीपफेक तकनीक अब पहले से ज्यादा वास्तविक दिखने वाले वीडियो बना सकती है, जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट में अंतर करना कठिन हो जाता है।
Fact Check
दावा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारत के पूर्व सेना प्रमुख को विवादित टिप्पणी करते हुए दिखाया गया।
जांच
सरकारी फैक्ट-चेक इकाई और डिजिटल विश्लेषण में वीडियो के ऑडियो-वीडियो पैटर्न की जांच की गई।
निष्कर्ष
वीडियो AI-जनरेटेड डीपफेक है और इसमें दिखाया गया बयान वास्तविक नहीं है।
Time Line
1. वीडियो वायरल होना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो तेजी से शेयर होना शुरू हुआ।
2. दावा फैलना
पोस्ट्स में कहा गया कि वीडियो में पूर्व सेना प्रमुख का हालिया बयान है।
3. फैक्ट-चेक जांच
सरकारी फैक्ट-चेक इकाई और विशेषज्ञों ने वीडियो की तकनीकी जांच की।
4. डीपफेक की पुष्टि
जांच में सामने आया कि वीडियो AI तकनीक से बनाया गया है।
यह मामला दिखाता है कि डीपफेक तकनीक सूचना युद्ध का नया और खतरनाक हथियार बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार, मीडिया और टेक कंपनियों को मिलकर डीपफेक पहचानने की तकनीक, डिजिटल साक्षरता और सख्त नियमों पर काम करना होगा।
पत्रकारिता और फैक्ट-चेकिंग की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि गलत सूचना को रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
अगर आपको सोशल मीडिया पर ऐसा कोई संदिग्ध वीडियो या दावा दिखाई दे, तो उसे शेयर करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापन जरूर करें।
Disclaimer : यह रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और सत्यापित स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी वायरल कंटेंट को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच आवश्यक है।
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