भारत ऊर्जा सुरक्षा समीक्षा: मध्य-पूर्व संकट के बीच हाई-लेवल मीटिंग, सप्लाई पर नजर
- नई दिल्ली | By – National Desk
Quick View
- मध्य-पूर्व तनाव के चलते भारत ने ऊर्जा आपूर्ति की समीक्षा शुरू की
- तेल और गैस सप्लाई चैन पर विशेष फोकस
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की स्थिति पर चर्चा
- “Global crisis vs India preparedness” बना मुख्य मुद्दा
- भविष्य के energy shocks से निपटने की रणनीति पर काम
Energy security India : मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा की हाई-लेवल समीक्षा नई दिल्ली में शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य तेल और गैस सप्लाई में संभावित बाधाओं से निपटना और भविष्य के ऊर्जा संकटों के लिए तैयारी सुनिश्चित करना है , ताकि देश की आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता आपूर्ति प्रभावित न हो।
Global Crisis vs India Preparedness
मध्य-पूर्व क्षेत्र, जो वैश्विक तेल सप्लाई का प्रमुख केंद्र है, वहां बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। ऐसे में किसी भी सप्लाई डिसरप्शन का असर महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सप्लाई चेन और स्टॉक पर फोकस
सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves – SPR) की स्थिति, रिफाइनरी ऑपरेशंस और आयात रूट्स की सुरक्षा की समीक्षा की। इसके साथ ही वैकल्पिक सप्लायर देशों (जैसे अमेरिका, रूस, अफ्रीका) से आयात बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
ऊर्जा सिस्टम की मजबूती
पावर ग्रिड, गैस पाइपलाइन और रिन्यूएबल एनर्जी के योगदान को भी समीक्षा में शामिल किया गया। लक्ष्य यह है कि अगर तेल सप्लाई प्रभावित हो, तो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तुरंत काम में लाए जा सकें।
“हम स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।” — ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी
भारत की ऊर्जा निर्भरता
- 85% कच्चा तेल आयात पर निर्भर
- प्रमुख सप्लायर: सऊदी अरब, इराक, UAE
- गैस आयात भी बढ़ती मांग के कारण बढ़ रहा है
रणनीतिक भंडार
- भारत के पास लगभग 9-10 दिन का SPR स्टॉक
- विस्तार योजनाएं जारी
Timelines
- 2020: SPR विस्तार योजना की शुरुआत
- 2022: रूस-यूक्रेन युद्ध से ऊर्जा कीमतों में उछाल
- 2025: रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
- मार्च 2026: मध्य-पूर्व तनाव के बीच हाई-लेवल समीक्षा
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन वैश्विक संकटों के प्रभाव से पूरी तरह बचना मुश्किल है। आने वाले समय में भारत को न केवल अपने आयात स्रोतों को diversify करना होगा, बल्कि renewable energy और domestic production पर भी तेजी से काम करना होगा।
👉 अगला कदम: SPR क्षमता बढ़ाना + ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन तेज करना
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Disclaimer : यह खबर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध विश्वसनीय जानकारी पर आधारित है। किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को शामिल नहीं किया गया है।
Source :
- Ministry of Petroleum & Natural Gas
- International Energy Agency (IEA)
- Reuters Energy News
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