- एडिटोरियल डेस्क
Quick View
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भारत सरकार ने ‘SHANTI’ एक्ट 2026 पेश किया, जो न्यूक्लियर एनर्जी पर केंद्रित है।
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जनवरी 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil) क्षमता 50% के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई।
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कोयले पर निर्भरता कम कर सीधे ‘ग्रीन न्यूक्लियर एनर्जी’ की ओर बढ़ने का लक्ष्य।
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आम नागरिकों के लिए ‘एनर्जी स्टैक’ मॉडल के जरिए सौर ऊर्जा से कमाई के अवसर।
Energy Stack : भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की दिशा में एक क्रांतिकारी छलांग लगाई है। जनवरी 2026 में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act ने देश को न्यूक्लियर पावर के एक नए युग में धकेल दिया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले जैसी जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को समाप्त कर परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा को मुख्यधारा में लाना है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर एक वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है।
SHANTI एक्ट: परमाणु ऊर्जा का लोकतंत्रीकरण
SHANTI एक्ट केवल बड़े रिएक्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा देता है। सरकार का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा को सुरक्षित, किफायती और ‘ग्रीन’ बनाना है ताकि औद्योगिक और घरेलू मांग को शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ पूरा किया जा सके।
कोयले से क्लीन एनर्जी की ओर महा-परिवर्तन
भारत अब ‘कोल-फर्स्ट’ नीति से हटकर ‘न्यूक्लियर-हाइब्रिड’ मॉडल की ओर बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत में मिली सफलता यह दर्शाती है कि भारत ने विकसित देशों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हरित ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त किया है। गैर-जीवाश्म क्षमता का 50% पार करना इस बात का प्रमाण है कि सौर, पवन और अब परमाणु ऊर्जा का समन्वय सफल रहा है।
एनर्जी स्टैक और आम आदमी का लाभ
इस नई नीति के तहत ‘एनर्जी स्टैक’ मॉडल पेश किया गया है। इसके माध्यम से आम नागरिक न केवल अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बचा पाएंगे, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचकर सीधे अपने बैंक खातों में पैसे भी प्राप्त कर सकेंगे। यह डिजिटल भुगतान और ऊर्जा वितरण का एक एकीकृत स्वरूप है।
“SHANTI एक्ट भारत की ऊर्जा संप्रभुता के लिए एक निर्णायक मोड़ है। हम न केवल अपनी 50% गैर-जीवाश्म क्षमता का जश्न मना रहे हैं, बल्कि परमाणु ऊर्जा को विकास का नया इंजन बना रहे हैं।” — अधिकारी, ऊर्जा मंत्रालय
Important Facts
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गैर-जीवाश्म हिस्सा: 50.2% (जनवरी 2026 तक)।
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मुख्य कानून: SHANTI एक्ट 2026।
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प्राथमिकता: नेट ज़ीरो 2070 के लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त करना।
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तकनीक: स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) और हाइब्रिड ग्रिड।
Timeline
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2015: पेरिस समझौते में नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारित।
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2021-2025: सौर और पवन ऊर्जा में भारी निवेश और विस्तार।
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जनवरी 2026: गैर-जीवाश्म क्षमता 50% के स्तर को पार कर गई।
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फरवरी 2026: संसद में SHANTI एक्ट को औपचारिक रूप से पेश किया गया।
भारत का ऊर्जा भविष्य अब कोयले के धुएं से मुक्त होकर परमाणु और सौर ऊर्जा की चमक की ओर बढ़ रहा है। SHANTI एक्ट के कार्यान्वयन से न केवल कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि यह देश को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाएगा। आने वाले समय में, परमाणु ऊर्जा का यह नया ढांचा ग्रामीण और शहरी भारत के बीच ऊर्जा की खाई को पाटने का काम करेगा।
भारत की इस ‘ग्रीन क्रांति’ के बारे में आप क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट करें!
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और नीतिगत घोषणाओं पर आधारित है। परमाणु ऊर्जा के कार्यान्वयन में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
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