–इंटरनेशनल डेस्क
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कनाडा सरकार ने 2026 के लिए स्टडी परमिट में 10% की अतिरिक्त कटौती की घोषणा की।
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वर्क परमिट के नियमों को सख्त बनाया गया, जिससे भविष्य में PR की राह कठिन हुई।
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भारतीय छात्रों के बीच ‘कनाडा ड्रीम’ को लेकर अनिश्चितता और मानसिक तनाव बढ़ा।
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आवास संकट और बढ़ती महंगाई को इमिग्रेशन कटौती का मुख्य कारण बताया गया।
Canada Study Permit : कनाडा सरकार द्वारा 2026 के लिए घोषित नई इमिग्रेशन नीतियों ने भारतीय छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के प्रशासन ने देश में बढ़ते आवास संकट और बुनियादी ढांचे पर पड़ते दबाव को कम करने के लिए स्टडी परमिट की संख्या में भारी कटौती की है। यह निर्णय न केवल उन हजारों भारतीय युवाओं को प्रभावित कर रहा है जो उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाने की योजना बना रहे थे, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है जो वहां पहले से मौजूद हैं और वर्क परमिट या स्थायी निवास (PR) की उम्मीद लगाए बैठे हैं। भारत और कनाडा के बीच मौजूदा कूटनीतिक तनाव के बीच, यह ‘वीजा संकट’ दोनों देशों के शैक्षिक और आर्थिक संबंधों में एक नया मोड़ ले आया है।
कड़े इमिग्रेशन नियम और उनका प्रभाव
कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने स्पष्ट किया है कि अब केवल उन्हीं छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कनाडा की श्रम बाजार की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। नए नियमों के तहत, पोस्ट-ग्रेजुएट वर्क परमिट (PGWP) प्राप्त करने के लिए अब भाषा प्रवीणता (Language Proficiency) के उच्च मानकों को अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या कनाडा अब पहली पसंद नहीं रहा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं। कनाडा में बढ़ती जीवन निर्वाह लागत (Cost of Living) और पार्ट-टाइम जॉब्स की कमी ने भी छात्रों के मोहभंग में बड़ी भूमिका निभाई है। जो छात्र पहले कनाडा को एक ‘आसान गेटवे’ मानते थे, वे अब वहां की सख्त नीतियों के कारण निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं।
“हम अंतरराष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करना जारी रखेंगे, लेकिन यह एक स्थायी स्तर पर होना चाहिए। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जो छात्र यहां आ रहे हैं, उन्हें उचित आवास और आवश्यक संसाधन मिल सकें।” — मार्क मिलर, कनाडाई इमिग्रेशन मंत्री
महत्वपूर्ण तथ्य
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वीजा कटौती: 2026 में स्टडी परमिट के लक्ष्य को 2025 के मुकाबले 10% कम करके 4,37,000 कर दिया गया है।
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PGWP पात्रता: वर्क परमिट के लिए अब यूनिवर्सिटी स्नातकों के लिए CLB 7 और कॉलेज स्नातकों के लिए CLB 5 का स्तर अनिवार्य है।
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आर्थिक प्रभाव: कनाडाई अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय छात्र सालाना लगभग 22 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं, जिसमें भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
संकट का घटनाक्रम
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जनवरी 2024: पहली बार स्टडी परमिट पर ‘कैप’ (सीमा) लगाने की घोषणा।
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सितंबर 2024: वर्क परमिट और स्पाउस वीजा नियमों को सख्त किया गया।
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जनवरी 2026: नए कोटा और भाषा मानकों का प्रभावी होना।
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अप्रैल 2026: भारतीय आवेदनों में 25% की गिरावट दर्ज की गई।
भारत-कनाडा संबंधों में यह ‘Student Visa’ संकट केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक बदलते वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य का संकेत है। आने वाले समय में भारतीय छात्रों को केवल उन कोर्सेज का चुनाव करना होगा जो कनाडा की ‘इन-डिमांड’ लिस्ट में हैं। कूटनीतिक स्तर पर, यदि भारत और कनाडा के संबंधों में सुधार नहीं होता है, तो वीजा प्रोसेसिंग समय और आवेदनों की अस्वीकृति दर में और वृद्धि देखी जा सकती है।
क्या आप भी कनाडा जाने की योजना बना रहे हैं? इन नए नियमों पर अपनी राय हमें कमेंट्स में बताएं और इस खबर को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो विदेश पढ़ाई के लिए जाना चाहते हैं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और आधिकारिक बयानों के विश्लेषण पर आधारित है। वीजा नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, कृपया आधिकारिक IRCC वेबसाइट की जांच करें।
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