— क्राइम चेक डेस्क
Quick View
-
अपराध में वृद्धि: 2024 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में 28,000 से अधिक मामले बढ़े।
-
Mule Accounts का जाल: अपराधी ‘Layer 1’ खातों का उपयोग कर अवैध धन को छिपा रहे हैं।
-
IMEI ब्लॉकिंग: सरकार ने अब तक 3.2 लाख से अधिक मोबाइल IMEIs को ब्लॉक किया।
-
मुख्य खतरे: स्टॉकिंग, प्रतिरूपण (Impersonation) और वित्तीय धोखाधड़ी सबसे आगे।
Crime alert : भारत में डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर अपराधियों के नेटवर्क ने भी अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं। गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के मुकाबले महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में 28,000 से अधिक की चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। अपराधी अब न केवल तकनीकी सेंधमारी कर रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के बैंक खातों को ‘Mule Accounts’ के रूप में इस्तेमाल कर कानूनी जाल में फंसा रहे हैं। इस संकट की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने लाखों मोबाइल हैंडसेट को ब्लैकलिस्ट करना शुरू कर दिया है।
क्या हैं ‘Layer 1 Mule Accounts’?
साइबर अपराधी सीधे अपने खाते में पैसे मंगाने के बजाय किसी निर्दोष व्यक्ति या लालच में आए व्यक्ति के खाते का उपयोग करते हैं। इसे ‘Mule Account’ कहा जाता है। ‘Layer 1’ का अर्थ है वह प्राथमिक खाता जहां धोखाधड़ी का पैसा सबसे पहले पहुंचता है। अपराधी अक्सर छात्रों या कम आय वाले लोगों को किराए पर खाता देने या कमीशन का लालच देकर शिकार बनाते हैं।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध: स्टॉकिंग और प्रतिरूपण
आंकड़ों से स्पष्ट है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। साइबर स्टॉकिंग और प्रतिरूपण (Impersonation) के मामलों में तेजी आई है। अपराधी डीपफेक तकनीक और सोशल मीडिया प्रोफाइल की क्लोनिंग कर महिलाओं को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
IMEI ब्लॉकिंग और सरकार का कड़ा रुख
गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर प्रहार किया है। अब तक 3.2 लाख से अधिक IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबरों को ब्लॉक किया गया है। इसका मतलब है कि ये मोबाइल फोन अब किसी भी भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क पर काम नहीं कर पाएंगे, जिससे अपराधियों के संचार तंत्र को तोड़ा जा सके।
“नागरिकों को अपने बैंक विवरण साझा करने में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। ‘Mule Accounts’ का हिस्सा बनना आपको अनजाने में एक गंभीर आपराधिक जांच के दायरे में ला सकता है। हम तकनीकी और कानूनी दोनों मोर्चों पर इस सिंडिकेट को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” — अधिकारी, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)
Important Facts
-
कुल ब्लॉक किए गए सिम: 5 लाख से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड्स को दूरसंचार विभाग की मदद से निष्क्रिय किया गया है।
-
शिकायत पोर्टल: 1930 हेल्पलाइन और ‘cybercrime.gov.in’ पर रिपोर्टिंग में 40% की वृद्धि देखी गई है।
-
Layering: अपराधी एक साथ 10-15 खातों में पैसा घुमाते हैं ताकि ट्रेल मिटाया जा सके।
साइबर सुरक्षा की दिशा में कदम
-
जनवरी 2024: साइबर सुरक्षित भारत पहल का विस्तार।
-
अगस्त 2025: Mule Accounts की पहचान के लिए बैंकों को नई AI-आधारित गाइडलाइंस जारी।
-
फरवरी 2026: महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए विशेष डिजिटल विंग का गठन।
-
अप्रैल 2026 (वर्तमान): 3 लाख से अधिक IMEIs को ब्लॉक करने की उपलब्धि।
भविष्य में साइबर सुरक्षा केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह व्यक्तिगत जागरूकता पर निर्भर करेगी। सरकार आने वाले समय में ‘Mule Accounts’ का पता लगाने के लिए रियल-टाइम बैंकिंग अलर्ट सिस्टम को और मजबूत करेगी। अगला कदम अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी समूहों के खिलाफ वैश्विक समन्वय बढ़ाना है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल हाइजीन अपनाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।
सावधान रहें! यदि कोई आपसे आपका बैंक खाता ‘किराए’ पर मांगता है या अज्ञात स्रोत से पैसे आने पर उसे कहीं और ट्रांसफर करने को कहता है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
Disclaimer : यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जन-जागरूकता फैलाना है। किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए आधिकारिक स्रोतों से परामर्श करें।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
