- शिमला| ब्यूरो डेस्क
Quick View
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गर्मियों के सीजन के साथ हिमाचल में ‘ईको-फ्रेंडली’ टूरिज्म की मांग में भारी उछाल।
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प्लास्टिक मुक्त पर्यटन के लिए राज्य सरकार ने कड़े किए नियम।
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होमस्टे योजना से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर।
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पर्यटकों का झुकाव अब भीड़भाड़ वाले होटलों से हटकर ग्रामीण ‘होमस्टे’ की ओर।
Eco-friendly Tourism : हिमाचल प्रदेश में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पर्यटन सीजन ने जोर पकड़ लिया है, लेकिन इस बार पर्यटकों का रुझान पारंपरिक होटलों के बजाय ग्रामीण और पारिस्थितिक रूप से सुरक्षित ‘होमस्टे’ की ओर अधिक देखा जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सस्टेनेबल टूरिज्म’ नीति के तहत न केवल प्लास्टिक मुक्त पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने ही घर में आतिथ्य सत्कार के जरिए स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। यह पहल न केवल पहाड़ों की संवेदनशीलता को बचा रही है, बल्कि पर्यटकों को हिमाचल की वास्तविक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से रूबरू होने का अनूठा मौका भी दे रही है।
सस्टेनेबल टूरिज्म और प्लास्टिक मुक्त अभियान
हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस साल पर्यटन स्थलों को कचरा मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्य पर्यटन केंद्रों जैसे शिमला, मनाली और धर्मशाला में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ सख्त चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। सस्टेनेबल टूरिज्म का उद्देश्य पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव डालते हुए पर्यटन गतिविधियों को संचालित करना है। इसके लिए रिसॉर्ट्स और होमस्टे मालिकों को बायो-डिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
होमस्टे कल्चर: स्वरोजगार की नई राह
हिमाचल प्रदेश होमस्टे योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हुई है। इस योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने घरों के कुछ कमरों को पर्यटकों के लिए तैयार करते हैं। इससे पर्यटकों को किफायती दरों पर रहने की सुविधा मिलती है और स्थानीय परिवारों को सीधी आय होती है। विशेष रूप से रिमोट एरिया जैसे स्पीति, सांगला और जंजैहली में यह कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
स्थानीय युवाओं का बढ़ता रुझान
पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए ‘होमस्टे’ एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। प्रशिक्षित युवा अब शहरों की ओर भागने के बजाय अपने पैतृक घरों को ईको-फ्रेंडली लॉज में बदल रहे हैं। यहाँ पर्यटकों को स्थानीय ‘धाम’ (पारंपरिक भोजन), खेती और लोक संस्कृति का अनुभव मिलता है, जो आधुनिक शहरी जीवन से ऊब चुके पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है।
“हमारा लक्ष्य हिमाचल को एक ‘ग्रीन टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करना है। होमस्टे न केवल पर्यटकों को हमारी संस्कृति से जोड़ते हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करते हैं कि पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। हम प्लास्टिक मुक्त और जिम्मेदार पर्यटन के लिए नई नीतियां लागू कर रहे हैं।” — अधिकारी, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग
Facts
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पंजीकरण: हिमाचल में अब तक 3,500 से अधिक होमस्टे इकाइयां पंजीकृत हो चुकी हैं।
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अनुदान: सरकार सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्थानीय निवासियों को सब्सिडी और टैक्स में छूट प्रदान कर रही है।
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अपशिष्ट प्रबंधन: कई गांवों ने ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल अपनाया है, जहाँ पर्यटकों द्वारा छोड़े गए कचरे का वैज्ञानिक निपटान किया जाता है।
Timelines
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2008: हिमाचल प्रदेश होमस्टे योजना की आधिकारिक शुरुआत।
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2023-24: ईको-टूरिज्म पॉलिसी में संशोधन कर सस्टेनेबिलिटी पर जोर।
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अप्रैल 2026: ‘प्लास्टिक मुक्त हिमाचल’ अभियान के तहत नए दिशा-निर्देश लागू।
हिमाचल प्रदेश में सस्टेनेबल टूरिज्म का भविष्य उज्ज्वल है। आने वाले समय में, यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि राज्य की जीडीपी में पर्यटन के योगदान को और अधिक समावेशी बनाएगा। अगला कदम डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है ताकि सुदूर क्षेत्रों के होमस्टे मालिक भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंच सकें। सरकार की योजना ‘ग्रीन सर्टिफिकेशन’ शुरू करने की है, जिससे अधिक से अधिक पर्यटन इकाइयों को ईको-फ्रेंडली बनाया जा सके।
क्या आप इस गर्मी हिमाचल की वादियों में एक ‘जिम्मेदार पर्यटक’ बनने के लिए तैयार हैं? अपने अगले ट्रिप के लिए स्थानीय होमस्टे चुनें और पर्यावरण बचाने में योगदान दें।
Disclaimer : यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। पर्यटन नीतियों और पंजीकरण के नियमों में बदलाव की नवीनतम जानकारी के लिए कृपया आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जाएं।
Source :
- HP Tourism Official
- Department of Tourism & Civil Aviation, HP
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