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- वाशिंगटन डीसी | इंटरनेशनल डेस्क
Quick View
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नासा का ओरियन कैप्सूल सोमवार को चंद्रमा के सबसे दूर स्थित हिस्से (Far Side) के पीछे से गुजरेगा।
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50 साल से अधिक समय के बाद इंसान पहली बार चंद्रमा के इतने करीब पहुंचेगा।
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मिशन में कमांडर रीड वाइसमैन सहित चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
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यह परीक्षण 2027 में होने वाली आर्टेमिस III चंद्रमा लैंडिंग का आधार बनेगा।
NASA Artemis II Mission : नासा का महात्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां ओरियन अंतरिक्ष यान सोमवार को चंद्रमा के रहस्यमयी ‘फॉर साइड’ (Far Side), जिसे अक्सर ‘डार्क साइड’ भी कहा जाता है, की ओर उड़ान भरेगा। यह ऐतिहासिक क्षण आधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण में एक मील का पत्थर है, क्योंकि अपोलो मिशन के समाप्त होने के पांच दशक बाद पहली बार मानवयुक्त यान पृथ्वी से इतनी दूर गया है। चार अंतरिक्ष यात्रियों की टीम वर्तमान में यान के सभी प्रणालियों की जांच कर रही है ताकि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके वापस पृथ्वी की ओर लौटने की प्रक्रिया (Free-Return Trajectory) को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
चंद्रमा का ‘फॉर साइड’ और ओरियन का सफर
चंद्रमा का वह हिस्सा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता, उसे ‘फॉर साइड’ कहा जाता है। सोमवार को जब ओरियन इस हिस्से के पीछे होगा, तब पृथ्वी के साथ उसका रेडियो संपर्क कुछ समय के लिए टूट जाएगा। यह मिशन का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। अंतरिक्ष यात्री इस दौरान चंद्रमा की सतह की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेंगे और भविष्य के लैंडिंग साइट्स का डेटा एकत्र करेंगे।
मिशन के पीछे का उद्देश्य
आर्टेमिस II का प्राथमिक लक्ष्य चंद्रमा पर उतरना नहीं, बल्कि ओरियन यान और ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) की क्षमताओं का परीक्षण करना है। नासा यह सुनिश्चित करना चाहता है कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम और संचार उपकरण गहरे अंतरिक्ष में मनुष्यों को सुरक्षित रख सकते हैं या नहीं।
नासा के प्रशासक ने मिशन की महत्ता पर जोर देते हुए कहा:
“हम केवल चंद्रमा पर वापस नहीं जा रहे हैं, बल्कि हम वहां से आगे मंगल ग्रह तक जाने की तैयारी कर रहे हैं। आर्टेमिस II उस साहस और तकनीक का प्रमाण है जो मानवता को सितारों के और करीब ले जाएगी।”
महत्वपूर्ण तथ्य
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दूरी: ओरियन पृथ्वी से लगभग 3,70,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर रहा है।
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टीम: इसमें तीन अमेरिकी (रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच) और एक कनाडाई (जेरेमी हैनसन) अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
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गति: चंद्रमा के पास पहुंचते समय यान की गति हजारों मील प्रति घंटा होगी।
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डार्क साइड: इसे ‘डार्क साइड’ कहा जाता है, लेकिन वहां भी सूर्य की रोशनी पड़ती है; बस वह हिस्सा पृथ्वी से नहीं दिखता।
मिशन टाइमलाइन
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लॉन्च: पिछले सप्ताह के अंत में फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से।
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सोमवार (कल): चंद्रमा के ‘फॉर साइड’ के पीछे से गुजरना और लूनर फ्लाईबाई।
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बुधवार-शुक्रवार: पृथ्वी की ओर वापसी की यात्रा शुरू करना।
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अगले सप्ताह: प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन (वापसी)।
भविष्य का प्रभाव और निष्कर्ष
आर्टेमिस II की सफलता सीधे तौर पर आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ करेगी, जिसमें पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। यह मिशन स्थायी चंद्र उपस्थिति (Sustainable Lunar Presence) और ‘गेटवे’ स्टेशन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान कर रहा है। आने वाले वर्षों में, चंद्रमा केवल एक गंतव्य नहीं, बल्कि मंगल ग्रह के मिशनों के लिए एक परीक्षण स्थल बनेगा।
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Disclaimer: यह रिपोर्ट वर्तमान उपलब्ध तकनीकी डेटा और नासा के आधिकारिक अपडेट्स पर आधारित है। मिशन की स्थितियां अंतरिक्ष के वातावरण के अनुसार बदल सकती हैं।
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