- इंटरनेशनल डेस्क
दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। दोनों देशों के बीच वर्षों पुराना सीमा विवाद समय-समय पर तनाव पैदा करता रहा है। 2025 के संघर्षों के बाद 2026 में भी सीमा पर अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देश सार्वजनिक रूप से युद्धविराम का पालन करने की बात कर रहे हैं, लेकिन सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य सतर्कता अभी भी बनी हुई है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद का इतिहास फ्रांसीसी औपनिवेशिक दौर तक जाता है। कई सीमावर्ती इलाकों और मंदिरों, विशेषकर प्रेह विहार (Preah Vihear) क्षेत्र, को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के कई फैसलों के बावजूद सीमा का कुछ हिस्सा आज भी विवादित माना जाता है।
- 1904-1907 – फ्रांसीसी नक्शों के आधार पर सीमा निर्धारण।
- 1962 – अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने प्रेह विहार मंदिर कंबोडिया को सौंपा।
- 2008-2011 – सीमा पर कई बार सैन्य झड़पें।
- 2025 – बड़े पैमाने पर सीमा संघर्ष और युद्धविराम समझौता।
- दिसंबर 2025 – दोनों देशों के बीच नया युद्धविराम।
- 2026 – दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सीमा पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
दक्षिण-पूर्व एशिया पर असर
- ASEAN की एकजुटता पर दबाव बढ़ा।
- सीमा पार व्यापार प्रभावित हुआ।
- पर्यटन और निवेश पर असर पड़ा।
- सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।
- क्षेत्रीय राजनीतिक विश्वास कमजोर हुआ।
Global Impact
- ASEAN की मध्यस्थता क्षमता पर सवाल।
- चीन, अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियां हालात पर नजर रखे हुए हैं।
- वैश्विक सप्लाई चेन और निवेशकों की चिंता बढ़ी।
- क्षेत्रीय स्थिरता अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
भारत के लिए थाईलैंड और कंबोडिया दोनों महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं।
भारत की “Act East Policy” के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थिरता महत्वपूर्ण है।
यदि सीमा तनाव बढ़ता है तो—
- क्षेत्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।
- भारत-ASEAN आर्थिक सहयोग पर असर पड़ सकता है।
- समुद्री सुरक्षा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल भारत के व्यापार या नागरिकों पर किसी बड़े प्रत्यक्ष प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच पूर्ण सैन्य संघर्ष की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन सीमा विवाद का स्थायी समाधान केवल राजनीतिक संवाद, सीमा आयोग और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन से ही संभव है।
2025 में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद युद्धविराम लागू किया गया था। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे हैं। हाल के महीनों में थाईलैंड ने युद्धविराम का पालन करने और विवाद को द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
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