- टेक डेस्क
Semiconductor Mission : भारत अब केवल मोबाइल फोन असेंबल करने वाला देश नहीं रहना चाहता। सरकार का लक्ष्य है कि भारत सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान बनाए।
इसी उद्देश्य से India Semiconductor Mission (ISM) शुरू किया गया। इसका मकसद देश में चिप निर्माण, पैकेजिंग, डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है।
आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार, मेडिकल उपकरण, रक्षा प्रणाली और AI सर्वर तक हर आधुनिक तकनीक में सेमीकंडक्टर चिप की जरूरत होती है।
Semiconductor क्या होता है?
सेमीकंडक्टर एक विशेष प्रकार का पदार्थ होता है जो बिजली का नियंत्रित प्रवाह संभव बनाता है।
इसी से माइक्रोचिप बनती हैं जो लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का “दिमाग” होती हैं।
India Semiconductor Mission की प्रमुख विशेषताएं
1. घरेलू चिप निर्माण
भारत में फैब्रिकेशन (Fab) इकाइयों को बढ़ावा।
2. Packaging एवं Testing
ATMP और OSAT सुविधाओं का विकास।
3. Chip Design
भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप को डिजाइन सहायता।
4. सरकारी प्रोत्साहन
योग्य परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता।
5. वैश्विक निवेश
दुनिया की बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना।
मिशन के फायदे (Pros)
- भारत में चिप निर्माण क्षमता बढ़ेगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूती मिलेगी।
- लाखों रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
- आयात पर निर्भरता घटेगी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को लाभ मिलेगा।
- AI, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर को फायदा होगा।
चुनौतियां (Cons)
- अत्यधिक पूंजी निवेश की जरूरत।
- निर्माण प्रक्रिया बेहद जटिल।
- उत्पादन शुरू होने में कई वर्ष लगते हैं।
- अत्यधिक शुद्ध पानी और बिजली की आवश्यकता।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा काफी मजबूत है।
तुलना
| पैरामीटर | भारत | ताइवान | दक्षिण कोरिया |
|---|---|---|---|
| निर्माण क्षमता | विकसित हो रही | बहुत मजबूत | बहुत मजबूत |
| सरकारी समर्थन | उच्च | उच्च | उच्च |
| वैश्विक हिस्सेदारी | सीमित | अग्रणी | अग्रणी |
| भविष्य की संभावनाएं | तेज़ी से बढ़ती | स्थिर | मजबूत |
कीमत (Price)
India Semiconductor Mission कोई उपभोक्ता उत्पाद नहीं है।
यह एक सरकारी औद्योगिक प्रोत्साहन कार्यक्रम है जिसके तहत पात्र परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अलग-अलग परियोजनाओं में निवेश और सहायता राशि भिन्न हो सकती है।
लॉन्च
- घोषणा: दिसंबर 2021
- उद्देश्य: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना।
भारत को इसकी जरूरत क्यों है?
कोविड-19 के दौरान पूरी दुनिया में चिप की कमी देखने को मिली।
इसके कारण
- कारों का उत्पादन प्रभावित हुआ।
- मोबाइल निर्माण धीमा पड़ा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर असर पड़ा।
इसी अनुभव के बाद कई देशों की तरह भारत ने भी घरेलू चिप निर्माण पर जोर बढ़ाया।
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?
- AI
- Data Center
- 5G
- EV
- Automotive
- Defence
- Telecom
- Consumer Electronics
- Medical Devices
भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है। हालांकि यह एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है और इसके लिए लगातार निवेश, तकनीकी सहयोग तथा कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
भारत लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के बड़े बाजार के रूप में उभरा है। लेकिन चिप निर्माण में उसकी हिस्सेदारी सीमित रही है। इसी अंतर को कम करने के लिए सरकार ने Semiconductor Mission की शुरुआत की।
| वर्ष | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 2021 | India Semiconductor Mission की घोषणा |
| 2022 | आवेदन और निवेश प्रक्रिया शुरू |
| 2023-2026 | विभिन्न परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर प्रगति |
- इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर मजबूत होगा।
- विदेशी निवेश बढ़ सकता है।
- रोजगार सृजन होगा।
- हाई-टेक विनिर्माण को गति मिलेगी।
- वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ सकती है।
Fact Check
- भारत ने Semiconductor Mission शुरू किया है।
- इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना है।
- यह कोई मोबाइल या गैजेट नहीं बल्कि सरकारी औद्योगिक मिशन है।
- परियोजनाओं की वित्तीय सहायता और निवेश परियोजना के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
Official Sources
- भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
- India Semiconductor Mission
- PIB
- Invest India
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