- ब्यूरो डेस्क
Rajasthan Civil Code 2026 : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 15 अगस्त 2026 को बीकानेर में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान राज्य की आगामी नीतिगत दिशा पर महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इसी क्रम में राजस्थान सिविल कोड-2026 लाने की घोषणा सामने आई। (Navbharat Times)
घटना क्या है?
राजस्थान सरकार राजस्थान सिविल कोड-2026 लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसकी घोषणा की।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य नागरिक मामलों में अधिक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। रिपोर्टों के अनुसार इसके दायरे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय आ सकते हैं। यह पहल संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित समान नागरिक संहिता की भावना से जोड़ी जा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि घोषणा और प्रस्तावित कानून के अंतिम रूप में अंतर हो सकता है। जब तक विधेयक विधायिका से पारित होकर लागू नहीं होता, तब तक इसे लागू कानून के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Timeline
14 अप्रैल 2026: राजस्थान सरकार ने समान नागरिक संहिता की दिशा में नीतिगत पहल की थी। इसके बाद ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
जून 2026: राज्य सरकार ने UCC-2026 के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने की जानकारी दी।
जून-जुलाई 2026: प्रस्तावित कानून के संभावित प्रावधानों को लेकर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर चर्चा तेज हुई।
14 अगस्त 2026: प्रस्तावित UCC से जुड़े विवाह पंजीकरण संबंधी प्रावधानों की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें विवाह के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण की बात कही गई।
15 अगस्त 2026: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजस्थान सिविल कोड-2026 लाने की घोषणा की।
कारण
राज्य सरकार की पहल के पीछे प्रमुख उद्देश्य नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना बताया गया है।
सरकार की ओर से UCC को संवैधानिक अनुच्छेद 44, लैंगिक समानता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों में एकरूपता के संदर्भ में रखा गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था में विवाह और तलाक के पंजीकरण, उत्तराधिकार तथा अन्य नागरिक अधिकारों को अधिक स्पष्ट और एकरूप बनाने पर जोर दिया जा सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था का संभावित प्रभाव
1. विवाह पंजीकरण
प्रस्तावित ड्राफ्ट से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने और इसके लिए समयसीमा तय करने का प्रावधान हो सकता है। एक रिपोर्ट में 60 दिनों की समयसीमा बताई गई है।
2. तलाक
तलाक से जुड़े मामलों में भी एक समान नागरिक कानूनी ढांचा विकसित करने की दिशा में बदलाव प्रस्तावित हैं।
3. उत्तराधिकार
संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े नियमों में समानता लाने का प्रयास प्रस्तावित कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
4. महिलाओं के अधिकार
सरकार की ओर से UCC की आवश्यकता को लैंगिक समानता और महिलाओं के कानूनी अधिकारों से भी जोड़ा गया है।
5. लिव-इन रिलेशनशिप
पहले सामने आए प्रस्तावित प्रावधानों में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से संबंधित व्यवस्था भी चर्चा में रही है। हालांकि अंतिम कानून में इसका स्वरूप विधायी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकारी कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने इस दिशा में केवल राजनीतिक घोषणा तक सीमित न रहकर ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति का उद्देश्य प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करना और विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त करना बताया गया है।
राजस्थान सरकार का आधिकारिक कानून पोर्टल राज्य के अधिनियमों, नियमों, अधिसूचनाओं और आदेशों को उपलब्ध कराता है। अंतिम विधायी स्थिति की पुष्टि के लिए सरकारी पोर्टल और विधानसभा दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण स्रोत होंगे।
जनता पर असर
यदि प्रस्तावित कानून विधानसभा से पारित होकर लागू होता है, तो राजस्थान में रहने वाले लोगों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े कानूनी नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव अंतिम विधेयक, विधानसभा की प्रक्रिया, संभावित संशोधनों और लागू होने की तारीख पर निर्भर करेगा।
इसलिए फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी दावे को “लागू कानून” मानना उचित नहीं है।
राजस्थान का सिविल कोड-2026 आने वाले समय में राज्य की नागरिक-कानूनी व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। मुख्यमंत्री की 15 अगस्त की घोषणा ने इस मुद्दे को फिर से राज्य की राजनीति और सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
लेकिन अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार अंतिम विधेयक में किन प्रावधानों को शामिल करती है और विधानसभा की प्रक्रिया के बाद कानून का वास्तविक स्वरूप क्या होगा।
इसलिए इस खबर को फिलहाल “UCC लागू” नहीं बल्कि “राजस्थान सिविल कोड लाने की सरकारी घोषणा” के रूप में रिपोर्ट करना तथ्यात्मक रूप से अधिक सही होगा।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
