- नेशनल डेस्क
405 defence items : भारत सरकार ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छठी Positive Indigenisation List (PIL) जारी की है। इसमें 405 रणनीतिक रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है, जिन्हें निर्धारित समयसीमा के बाद भारतीय उद्योग से ही हासिल किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सूची में भारतीय तटरक्षक बल से जुड़ी 16 और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) से जुड़ी 389 वस्तुएं शामिल हैं। इनका अनुमानित कारोबारी संभावित मूल्य करीब ₹3,070 करोड़ है।
इस फैसले का सीधा उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता घटाना, घरेलू रक्षा कंपनियों और MSMEs को अवसर देना तथा भारत की रणनीतिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
Background: Positive Indigenisation List क्या है?
Positive Indigenisation List ऐसी रक्षा वस्तुओं की सूची है जिन्हें तय समयसीमा के बाद भारतीय सशस्त्र बलों और रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए घरेलू स्रोतों से हासिल करना होता है।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई सूचियां जारी की हैं। सरकार ने इसके लिए SRIJAN Portal को भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से रक्षा प्रतिष्ठान और उद्योग स्वदेशीकरण के अवसरों से जुड़ते हैं।
2024 में जारी पांचवीं PIL में 346 वस्तुएं शामिल की गई थीं। उस समय रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि पहले की सूचियों में शामिल हजारों वस्तुओं का स्वदेशीकरण हो चुका था और घरेलू कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए गए थे।
नई सूची में क्या खास है?
नई छठी सूची में 405 रणनीतिक वस्तुएं शामिल हैं। इनमें विभिन्न रक्षा प्रणालियों के पुर्जे, सब-सिस्टम, स्पेयर और अन्य महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं।
रिपोर्टों के अनुसार सूची में ऐसे घटक भी शामिल हैं जो Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमान और T-90 जैसे टैंक से जुड़े हैं।
इसका मतलब यह है कि आत्मनिर्भरता का दायरा केवल हथियारों या बड़े प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके महत्वपूर्ण घटकों और सप्लाई चेन तक भी बढ़ाया जा रहा है।
सरकार का पक्ष
रक्षा मंत्रालय की नीति का मूल उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत, आयात निर्भरता में कमी और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करना है।
सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि स्वदेशीकरण से घरेलू उद्योग में निवेश, तकनीकी क्षमता, अनुसंधान एवं विकास तथा MSME और स्टार्टअप भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। 2024 की पांचवीं सूची के समय रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि स्वदेशीकरण घरेलू उद्योग की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
नई सूची इसी व्यापक नीति की अगली कड़ी है।
विशेषज्ञ राय: असली चुनौती सिर्फ सूची जारी करना नहीं
रक्षा स्वदेशीकरण के जानकारों के नजरिए से इस कदम का महत्व बड़ा है, लेकिन इसकी सफलता का आकलन केवल सूची में शामिल वस्तुओं की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए।
असल परीक्षा यह होगी कि भारतीय कंपनियां:
- आवश्यक गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रख पाती हैं या नहीं
- समय पर उत्पादन कर पाती हैं या नहीं
- महत्वपूर्ण तकनीकों को विकसित कर पाती हैं या नहीं
- पर्याप्त उत्पादन क्षमता बना पाती हैं या नहीं
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लागत हासिल कर पाती हैं या नहीं
रक्षा क्षेत्र में किसी पुर्जे का घरेलू उत्पादन तभी रणनीतिक रूप से सफल माना जाएगा जब वह गुणवत्ता, सुरक्षा, लागत और समय—चारों मानकों पर भरोसेमंद हो।
पिछले स्वदेशीकरण कार्यक्रमों में घरेलू उद्योग और MSMEs की भागीदारी बढ़ने के संकेत मिले हैं। 2024 में रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि DPSUs ने घरेलू विक्रेताओं को हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए थे।
जनता पर प्रभाव
इस फैसले का आम नागरिक पर तत्काल प्रभाव किसी नए टैक्स या सब्सिडी की तरह दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
1. रोजगार के अवसर
रक्षा विनिर्माण बढ़ने से इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनिंग, एयरोस्पेस, AI, रोबोटिक्स और सप्लाई-चेन से जुड़े रोजगार बढ़ सकते हैं।
2. MSMEs और स्टार्टअप को अवसर
बड़ी रक्षा कंपनियों के अलावा छोटे और मध्यम उद्योगों को भी सप्लाई चेन में प्रवेश करने का अवसर मिल सकता है।
3. विदेशी मुद्रा की बचत
यदि पहले आयात किए जाने वाले रक्षा घटक देश में बनने लगते हैं तो आयात पर होने वाला विदेशी मुद्रा खर्च कम हो सकता है।
4. रणनीतिक सुरक्षा
युद्ध या वैश्विक संकट के दौरान विदेशी सप्लाई चेन बाधित होने पर घरेलू उत्पादन क्षमता भारत की रणनीतिक मजबूती बढ़ा सकती है।
5. रक्षा उद्योग में निवेश
सरकारी मांग स्पष्ट होने से निजी कंपनियों को उत्पादन क्षमता और तकनीक में निवेश करने का अधिक भरोसा मिल सकता है।
भारत के लिए इसका बड़ा अर्थ क्या है?
रक्षा आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल विदेशी हथियार खरीदना बंद करना नहीं है।
इसका बड़ा लक्ष्य है—
Design → Technology → Manufacturing → Components → Maintenance → Upgrades → Exports
यानी भारत केवल रक्षा सामान का खरीदार न रहे, बल्कि डिजाइन और निर्माण से लेकर वैश्विक निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन में मजबूत भूमिका निभाए।
नई 405-item सूची इसी दिशा में एक और कदम है।
405 रक्षा वस्तुओं को स्वदेशी बनाने का फैसला सिर्फ ‘Make in India’ की एक और सूची नहीं है। इसका महत्व भारत की रक्षा सप्लाई चेन को विदेशी निर्भरता से निकालकर घरेलू तकनीक, उद्योग और अनुसंधान से जोड़ने में है।
हालांकि अंतिम सफलता सूची जारी होने से नहीं, बल्कि समय पर उत्पादन, गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और वास्तविक ऑर्डर में बदलने से तय होगी।
भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती यही होगी कि इन 405 वस्तुओं के स्वदेशीकरण को कागज से निकालकर वास्तविक उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक कैसे पहुंचाया जाए।
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