- नेशनल डेस्क
Critical Infrastructure Manufacturing: Critical Infrastructure यानी ऐसी महत्वपूर्ण प्रणालियां और सेवाएं जिनके बिना किसी देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामान्य जनजीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
इसमें बिजली और ऊर्जा नेटवर्क, दूरसंचार, इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम, बैंकिंग एवं वित्तीय नेटवर्क, परिवहन, रक्षा, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति और कुछ रणनीतिक औद्योगिक प्रणालियां शामिल हो सकती हैं।
आज के दौर में इन सभी क्षेत्रों की निर्भरता तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, सेंसर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर पर लगातार बढ़ रही है।
यही कारण है कि Critical Infrastructure की सुरक्षा केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। इसके लिए मजबूत और भरोसेमंद घरेलू Manufacturing Ecosystem भी जरूरी हो गया है।
Domestic Manufacturing क्यों जरूरी है?
किसी महत्वपूर्ण उपकरण या तकनीक के लिए अगर पूरा देश विदेशी सप्लायर पर निर्भर है, तो संकट की स्थिति में उसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
युद्ध, महामारी, व्यापार प्रतिबंध, समुद्री परिवहन में बाधा, भू-राजनीतिक तनाव या वैश्विक सप्लाई-चेन संकट किसी भी समय महत्वपूर्ण सामान की आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
सेमीकंडक्टर इसका बड़ा उदाहरण हैं। भारत सरकार के अनुसार चिप्स अब ऊर्जा नेटवर्क, वित्तीय बाजार, दूरसंचार, अस्पताल, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
इसलिए Domestic Manufacturing का उद्देश्य केवल आयात कम करना नहीं है, बल्कि संकट के समय महत्वपूर्ण प्रणालियों की Continuity सुनिश्चित करना भी है।
1. National Security मजबूत होती है
Critical Infrastructure में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और तकनीकों का देश की सुरक्षा से सीधा संबंध हो सकता है।
दूरसंचार नेटवर्क, रक्षा प्रणालियां, निगरानी उपकरण, ऊर्जा ग्रिड और रणनीतिक संचार प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि महत्वपूर्ण तकनीक और उपकरण पूरी तरह बाहरी सप्लाई पर निर्भर हों, तो संकट की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
Domestic Manufacturing से देश को कम-से-कम महत्वपूर्ण उत्पादों और components के लिए वैकल्पिक घरेलू क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
2. Supply Chain Resilience बढ़ती है
Global supply chain कई देशों और कंपनियों पर निर्भर होती है।
एक देश में उत्पादन रुकने पर उसका असर दूसरे देशों तक पहुंच सकता है। कोविड-19 के दौरान semiconductor shortages ने इस vulnerability को स्पष्ट किया था।
भारत की Semiconductor नीति भी इसी चुनौती को ध्यान में रखती है। सरकार के अनुसार भारत में Semiconductor ecosystem को design, fabrication, packaging, equipment, materials और talent तक विस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसका मतलब है कि लक्ष्य केवल chip बनाना नहीं, बल्कि पूरी value chain को मजबूत करना है।
3. Digital Sovereignty के लिए जरूरी
आज Banking, UPI, Telecom, Cloud, Data Centres, Government Services और AI infrastructure जैसी सेवाएं डिजिटल तकनीक पर निर्भर हैं।
इन प्रणालियों के पीछे servers, processors, networking equipment, sensors, power electronics और semiconductor components काम करते हैं।
यदि इन critical components की supply पर अत्यधिक बाहरी निर्भरता हो, तो Digital Infrastructure की resilience प्रभावित हो सकती है।
इसलिए Domestic Manufacturing को Digital Sovereignty की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
4. संकट के समय तेज प्रतिक्रिया संभव
मान लीजिए किसी महत्वपूर्ण telecom component या power electronics device की वैश्विक आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है।
अगर देश में उसका manufacturing ecosystem मौजूद है, तो स्थानीय कंपनियां production बढ़ाने, repair components उपलब्ध कराने और alternative designs विकसित करने की स्थिति में बेहतर ढंग से काम कर सकती हैं।
Domestic capacity हर समस्या का तत्काल समाधान नहीं देती, लेकिन यह strategic fallback जरूर उपलब्ध कराती है।
5. रोजगार और औद्योगिक विकास
Domestic Manufacturing का एक बड़ा आर्थिक लाभ रोजगार है।
जब केवल finished product assemble करने के बजाय components, machinery, materials, testing और design जैसी गतिविधियां भी देश में विकसित होती हैं, तो value addition बढ़ता है।
भारत के electronics manufacturing ecosystem में रोजगार का विस्तार इसी दिशा की ओर संकेत करता है। जुलाई 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत का electronics manufacturing sector लगभग 25 लाख direct और indirect jobs को support कर रहा था।
इससे MSMEs और ancillary industries के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
6. Semiconductor Manufacturing क्यों महत्वपूर्ण है?
Semiconductor को आधुनिक Critical Infrastructure की बुनियादी तकनीकों में से एक माना जा सकता है।
Smartphone से लेकर automobile, telecom equipment, satellites, medical devices, defence systems और AI infrastructure तक chips की भूमिका बढ़ रही है।
भारत ने इसी कारण Semiconductor ecosystem को रणनीतिक प्राथमिकता दी है।
India Semiconductor Mission का उद्देश्य भारत में semiconductor और display manufacturing ecosystem विकसित करना तथा देश को electronics manufacturing और design का global hub बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
जुलाई 2026 तक सरकार के अनुसार 12 semiconductor projects को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिनकी कुल committed investment ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक थी और तीन परियोजनाओं में commercial production शुरू हो चुका था।
7. Defence Manufacturing में Domestic Capability
Defence sector में import dependency का प्रश्न और भी संवेदनशील हो जाता है।
Aircraft, missiles, radar, communication systems, drones, electronic warfare और अन्य defence platforms में बड़ी संख्या में advanced components और technologies का इस्तेमाल होता है।
भारत ने defence indigenisation और domestic procurement को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 तक 10 Positive Indigenisation Lists में कुल 5,521 items शामिल किए गए थे।
इसका व्यापक उद्देश्य defence supply chain में domestic capabilities को बढ़ाना है।
8. सिर्फ Assembly नहीं, पूरी Value Chain जरूरी
Domestic Manufacturing का मतलब केवल किसी विदेशी product को भारत में assemble करना नहीं होना चाहिए।
असल रणनीतिक मजबूती तब आएगी जब भारत में:
- Product Design
- R&D
- Semiconductor Design
- Components
- Raw Materials
- Manufacturing Equipment
- Fabrication
- Packaging
- Testing
- Repair & Maintenance
जैसी क्षमताएं भी विकसित हों।
भारत की Semiconductor नीति में भी design से manufacturing, packaging और materials तक ecosystem विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
9. लेकिन Domestic Manufacturing के साथ Quality भी जरूरी
आत्मनिर्भरता का मतलब यह नहीं कि केवल घरेलू उत्पाद होने के कारण उसकी गुणवत्ता को स्वीकार कर लिया जाए।
Critical Infrastructure के लिए उत्पादों को:
Quality + Security + Reliability + Cost Competitiveness + Scalability
इन सभी मानकों पर खरा उतरना होगा।
अगर घरेलू उत्पाद महंगा, कम विश्वसनीय या तकनीकी रूप से कमजोर है, तो केवल import substitution लंबे समय में पर्याप्त नहीं होगा।
इसलिए भारत को competitive self-reliance की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
10. भारत के लिए आगे की चुनौती क्या है?
भारत के सामने अवसर बड़ा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
Advanced manufacturing के लिए बड़े capital investments, skilled workforce, research ecosystem, intellectual property, reliable power, specialised materials और global technology partnerships की आवश्यकता होगी।
साथ ही घरेलू कंपनियों को केवल भारतीय बाजार के लिए नहीं, बल्कि global markets के लिए भी competitive बनाना होगा।
NITI Aayog की 2026 semiconductor roadmap भी भारत को केवल बड़े consumer market के रूप में नहीं, बल्कि global semiconductor value chain में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में देखती है।
आत्मनिर्भरता से आगे है Strategic Resilience
Critical Infrastructure में Domestic Manufacturing अब केवल “Made in India” का विषय नहीं है।
यह सवाल है कि संकट के समय देश अपनी बिजली, दूरसंचार, डिजिटल नेटवर्क, रक्षा प्रणाली, परिवहन और रणनीतिक उद्योगों को कितनी मजबूती से चला सकता है।
भारत के लिए सही रास्ता पूर्ण isolation नहीं, बल्कि Strategic Resilience है—जहां घरेलू manufacturing मजबूत हो, लेकिन global supply chains से भी समझदारीपूर्ण जुड़ाव बना रहे।
आने वाले वर्षों में जिस देश के पास technology, manufacturing और supply-chain resilience का मजबूत संयोजन होगा, उसकी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति उतनी ही मजबूत होगी।
भारत के लिए Domestic Manufacturing इसी व्यापक रणनीतिक बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
स्रोत: PIB, NITI Aayog, India Semiconductor Mission और भारत सरकार की संबंधित आधिकारिक सूचनाएं।
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