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- इंटरनेशनल डेस्क
Nepal-China Flood: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी विनाशकारी बाढ़, मलबे और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी है। नेपाली अधिकारियों के अनुसार नेपाल में 781 लोगों की मौत और 2,502 लोगों के लापता होने की सूचना है। चीन की ओर से तिब्बत में 16 मौतें और 546 लोग लापता बताए गए हैं। दोनों पक्षों के आंकड़ों को जोड़ने पर 797 मौतें और 3,048 लोग लापता होते हैं।
स्थिति अभी स्थिर नहीं मानी जा सकती। खराब मौसम, पहाड़ी भूभाग, बढ़ता जलस्तर, क्षतिग्रस्त सड़कें और नए भूस्खलन का खतरा रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी बाधाएं हैं।
Fact Sheet
| तथ्य | ताजा स्थिति |
|---|---|
| नेपाल में मौतें | 781 |
| नेपाल में लापता | 2,502 |
| तिब्बत में मौतें | 16 |
| तिब्बत में लापता | 546 |
| संयुक्त मौतें | 797 |
| संयुक्त लापता | 3,048 |
| प्रभावित आबादी | 90,000+ का अनुमान |
| रेस्क्यू स्थिति | अभियान जारी |
| प्रमुख बाधाएं | खराब मौसम, मलबा, दुर्गम भूभाग, बढ़ता जलस्तर |
| विदेशी नागरिक | तिब्बत में 23 देशों के 261 नागरिक लापता बताए गए |
उपरोक्त आंकड़े 30 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और राहत अभियान के दौरान बदल सकते हैं।
नेपाल-चीन सीमा पर रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के पांचवें दिन भी हजारों लोगों की तलाश जारी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि आपदा ने सिर्फ लोगों को प्रभावित नहीं किया, बल्कि रेस्क्यू तक पहुंचने के रास्ते भी नष्ट कर दिए हैं।
नेपाल में 781 मौतों और 2,502 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। चीन की ओर से तिब्बत में 16 मौतें और 546 लापता बताए गए हैं। इस तरह उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर दोनों क्षेत्रों में कुल मृतकों की संख्या 797 और लापता लोगों की संख्या 3,048 है।
खराब मौसम बना सबसे बड़ा रोड़ा
रेस्क्यू अभियान में हेलीकॉप्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण हवाई अभियान कई बार प्रभावित हुआ। वहीं पहाड़ी इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से जमीनी रास्तों से पहुंचना भी मुश्किल है।
नदी का बढ़ता जलस्तर और नए खतरे
प्रभावित क्षेत्रों में कुछ नदियों के जलस्तर में फिर वृद्धि की सूचना मिली है। नेपाल के अधिकारियों ने Bhotekoshi River के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद कई प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतने को कहा है।
इसके अलावा आपदा से बने जलाशय/झील और उसके आसपास हुए नए भूस्खलन ने अतिरिक्त बाढ़ का खतरा पैदा किया है। चीन की ओर से एक नए भूस्खलन के कारण पानी के नए जमाव की सूचना भी दी गई है।
सबसे संवेदनशील रेस्क्यू पॉइंट: हाइड्रोपावर टनल
बचाव अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा उन लोगों की तलाश है जो बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
Reuters/CNA की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में कई हाइड्रोपावर साइटों पर बड़ी संख्या में श्रमिकों के लापता होने की सूचना है। विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीमों को सुरंगों में ऑक्सीजन पहुंचाने और अंदर मौजूद लोगों तक पहुंच बनाने की चुनौती है।
यही कारण है कि नेपाल ने विशेष टनल रेस्क्यू, DNA टेस्टिंग, शवों के संरक्षण और फॉरेंसिक पहचान में अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत बताई है।
शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती
कई शव लंबे समय तक पानी और मलबे में रहने के कारण पहचान योग्य नहीं रह गए हैं। नेपाल में अज्ञात शवों की पहचान के लिए फोटो रिकॉर्डिंग और DNA सैंपलिंग की जा रही है।
कुछ अज्ञात शवों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए दफनाया भी जा रहा है, जबकि उनके DNA और अन्य पहचान संबंधी विवरण सुरक्षित किए जा रहे हैं ताकि बाद में परिवारों को पहचान में मदद मिल सके।
International Angle
इस आपदा का प्रभाव नेपाल और चीन तक सीमित नहीं है। तिब्बत में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। कई लोग तीर्थयात्रा, पर्यटन या काम के सिलसिले में क्षेत्र में मौजूद थे।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र से जुड़े यात्रियों और भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह आपदा इतनी विनाशकारी क्यों बनी?
हिमालयी क्षेत्र में ऊंचाई, तीव्र ढलान, ग्लेशियर और संकरी नदी घाटियां किसी भी अचानक आने वाले जलप्रवाह को अत्यधिक विनाशकारी बना सकती हैं।
इस मामले में पानी के साथ बर्फ, चट्टान और भारी मलबे का प्रवाह हुआ, जिसने सामान्य बाढ़ की तुलना में कहीं अधिक व्यापक नुकसान किया। उपलब्ध रिपोर्टों में ग्लेशियर अस्थिरता और दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन के संबंध का उल्लेख है, लेकिन किसी एक कारण को अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना अभी जल्दबाजी होगी।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
पहला: हिमालयी क्षेत्र भारत के उत्तर में स्थित है और नेपाल-तिब्बत में होने वाली बड़ी जलवायु एवं जल संबंधी घटनाएं क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।
दूसरा: बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और तीर्थयात्री हिमालयी तथा कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र की यात्रा करते हैं।
तीसरा: ग्लेशियर, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसे खतरे भविष्य में हिमालयी राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण आपदा-प्रबंधन चुनौती बन सकते हैं।
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