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- एंटरटेनमेंट डेस्क
Sham Kaushal : बॉलीवुड के दिग्गज एक्शन डायरेक्टर और स्टंट कोऑर्डिनेटर Sham Kaushal ने अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर के अनुभव के आधार पर कहा है कि फिल्म में एक्शन का उद्देश्य सिर्फ दर्शकों को चौंकाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे कहानी, किरदार और निर्देशक की दृष्टि को आगे बढ़ाना चाहिए।
30 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक इंटरव्यू में Kaushal ने कहा कि वह किसी फिल्म के एक्शन को डिजाइन करने से पहले निर्देशक की vision, script और characters को समझने पर ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, एक ही परिस्थिति में अलग-अलग किरदार अलग तरह से प्रतिक्रिया करेंगे और इसी वजह से action को narrative के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
उनका यह विचार बॉलीवुड में action cinema के बदलते स्वरूप को समझने का एक महत्वपूर्ण रास्ता देता है—जहाँ पुराने दौर का gravity-defying spectacle धीरे-धीरे character-driven और emotionally grounded action की तरफ बढ़ा है।
Fact Sheet
- Sham Kaushal ने अपने करियर की शुरुआत stuntman के रूप में की और लगभग सात साल बाद 1990 में स्वतंत्र action director के रूप में काम शुरू किया।
- उनकी filmography में Gangs of Wasseypur, Dangal, Bajirao Mastani, Padmaavat, Krrish, Dhoom 3, PK, Sanju और कई अन्य फिल्में शामिल हैं।
- उन्होंने Slumdog Millionaire और Mission: Impossible – Ghost Protocol जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है।
- Kaushal के मुताबिक उनका मूल सिद्धांत है कि action कहानी की सेवा करे, न कि कहानी action sequence की।
- उन्होंने भारतीय सिनेमा को अपनी संस्कृति और अपनी कहानियों से जुड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।
Action का मतलब सिर्फ बड़ा stunt नहीं
बॉलीवुड में लंबे समय तक action को अक्सर बड़े stunts, उड़ती गाड़ियों, भारी-भरकम fights और असंभव लगने वाली physical feats से जोड़ा जाता रहा। लेकिन Sham Kaushal की सोच इस बात पर जोर देती है कि किसी action sequence की सफलता केवल उसके scale से तय नहीं होती।
उनका कहना है कि action को निर्देशक की vision और फिल्म के narrative से निकलना चाहिए। वह script और characters को समझने के बाद sequence की कल्पना करने की बात करते हैं।
यानी सवाल यह नहीं कि “कितना बड़ा stunt दिखाया जा सकता है?”
बल्कि सवाल यह होना चाहिए:
“इस किरदार और इस कहानी के लिए कौन-सा action स्वाभाविक है?”
Character बदलता है तो Action भी बदलना चाहिए
Kaushal की बात का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा character psychology है।
एक trained soldier, एक डरपोक आम आदमी और एक emotionally disturbed व्यक्ति अगर एक ही खतरे का सामना करें, तो तीनों की प्रतिक्रिया समान नहीं होगी।
इसी सोच के कारण story-driven action में choreography केवल physical movement नहीं रह जाती। वह character की personality को भी व्यक्त करती है।
यही वजह है कि realistic action में कई बार छोटा-सा movement भी बड़े spectacle से ज्यादा प्रभाव पैदा कर सकता है।
‘Gangs of Wasseypur’ से ‘Dangal’ तक बदलाव
Kaushal ने अपने काम के संदर्भ में Black Friday, Gangs of Wasseypur, Dangal, Padmaavat और Slumdog Millionaire जैसी फिल्मों का उल्लेख किया है।
इन फिल्मों की दुनिया एक जैसी नहीं है।
कहीं crime और social violence है, कहीं sports drama, कहीं historical setting और कहीं survival-based storytelling।
इसलिए इन फिल्मों का action भी एक ही formula पर आधारित नहीं हो सकता।
यहीं story-driven action की अहमियत सामने आती है।
Sanjay Leela Bhansali और Danny Boyle से क्या सीख मिली?
Sham Kaushal ने निर्देशक Sanjay Leela Bhansali और Danny Boyle के साथ काम करने के अनुभव को भी याद किया।
उन्होंने बताया कि Danny Boyle ने Slumdog Millionaire के लिए ट्रेन sequence का विचार उनके सामने रखा था। Kaushal ने उसे practically visualize करने के लिए miniature train का इस्तेमाल किया।
इसी तरह Bhansali के साथ Goliyon Ki Raasleela: Ram-Leela में काम करने का अनुभव उनके लिए विशेष था।
यह उदाहरण दिखाता है कि बड़े action sequence केवल stunt execution से नहीं बनते। उनके पीछे planning, visualization, director की creative language और technical execution का संयोजन होता है।
Stunt से Story तक क्यों बदला Bollywood Action?
1. दर्शक अब ज्यादा context चाहते हैं
आज दर्शक केवल यह नहीं देखना चाहता कि hero ने कितने लोगों को हराया। वह यह भी समझना चाहता है कि लड़ाई क्यों हुई और उसका emotional consequence क्या है।
2. Realism की मांग बढ़ी है
Digital effects और बड़े production budgets ने spectacle की सीमा बढ़ा दी है। ऐसे में केवल scale से अलग दिखना मुश्किल है।
Realism, character और emotion action को अलग पहचान दे सकते हैं।
3. Genre बदल गया है
Action अब केवल traditional action films तक सीमित नहीं है।
Crime drama, historical films, sports films, thrillers और social dramas में भी action महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसलिए हर कहानी के लिए एक अलग action language जरूरी है।
4. Director और Action Team का Collaboration
Kaushal की कार्यशैली यह भी बताती है कि action director को केवल execution specialist के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।
Script और character की समझ action design का हिस्सा बन चुकी है।
भारतीय सिनेमा के लिए बड़ा सवाल
Sham Kaushal का दूसरा महत्वपूर्ण विचार केवल action तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करनी है, तो उसे अपनी संस्कृति और अपनी कहानियों पर भरोसा करना चाहिए। उनके मुताबिक भारत के पास इतिहास और कहानियों का विशाल भंडार है।
इसका अर्थ यह नहीं कि भारतीय सिनेमा को international filmmaking techniques से दूर रहना चाहिए।
बल्कि संदेश यह है कि तकनीक वैश्विक हो सकती है, लेकिन कहानी की पहचान अपनी हो सकती है।
Impact
Sham Kaushal की टिप्पणी को बॉलीवुड के लिए तीन स्तरों पर देखा जा सकता है:
Cinema: Action को narrative और character से जोड़ने की प्रवृत्ति मजबूत हो सकती है।
Audience: दर्शक spectacle के साथ emotional payoff भी तलाश रहा है।
Industry: Action directors की भूमिका केवल stunt execution से आगे बढ़कर creative storytelling का हिस्सा बन रही है।
What Next?
आने वाले वर्षों में Bollywood action के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह scale और substance के बीच संतुलन कैसे बनाए।
बड़े action set-pieces दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन अगर उनका कहानी से संबंध कमजोर है तो उनका प्रभाव सीमित हो सकता है।
इसके उलट, ऐसा action जो character की journey को आगे बढ़ाता है, फिल्म की पूरी narrative experience का हिस्सा बन सकता है।
इस लिहाज से Sham Kaushal का विचार एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण principle सामने रखता है:
अच्छा action वह नहीं जो कहानी को रोक दे; अच्छा action वह है जो कहानी को आगे बढ़ाए।
Sources / Verification
- Variety India — Sham Kaushal interview, 30 August 2026.
- Sham Kaushal official filmography.
- IMDb — Sham Kaushal biography and credits.
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