- डेस्क टीम
आज का पंचांग 31 अगस्त 2026: आज सोमवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सुबह करीब 8:50 बजे तक रहेगी, इसके बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू होगी। आज रेवती नक्षत्र प्रभावी है, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा। आज का दिन कजरी तीज और हेरंब संकष्टी चतुर्थी/बहुला चतुर्थी जैसे धार्मिक अवसरों से भी जुड़ा है।
महत्वपूर्ण: पंचांग के मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्र के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, व्रत-उपवास या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग/पंडित से समय की पुष्टि करना उचित है।
आज का पंचांग
| पंचांग तत्व | आज की स्थिति |
|---|---|
| दिन | सोमवार |
| तारीख | 31 अगस्त 2026 |
| विक्रम संवत | 2083 |
| शक संवत | 1948 |
| मास | भाद्रपद |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| तिथि | तृतीया सुबह लगभग 8:50 बजे तक, फिर चतुर्थी |
| नक्षत्र | रेवती, इसके बाद अश्विनी |
| योग | गण्ड, इसके बाद वृद्धि |
| करण | विष्टि/भद्रा के बाद बव |
| चंद्र राशि | मीन |
| सूर्य राशि | सिंह |
| सूर्योदय, दिल्ली | लगभग 5:58 AM |
| सूर्यास्त, दिल्ली | लगभग 6:44 PM |
| प्रमुख पर्व/व्रत | कजरी तीज, बहुला चतुर्थी, हेरंब संकष्टी चतुर्थी |
पंचांग स्रोतों में तिथि, नक्षत्र और योग के संक्रमण के समय में स्थान के अनुसार मामूली अंतर दिखाई देता है; इसलिए स्थानीय शहर के पंचांग को अंतिम संदर्भ माना जाना चाहिए।
तिथि: सुबह तृतीया, फिर चतुर्थी
आज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि लगभग सुबह 8:50 बजे तक है। इसके बाद कृष्ण पक्ष चतुर्थी आरंभ होती है। चतुर्थी अगले दिन, 1 सितंबर की सुबह तक रहने वाली है।
यही तिथि परिवर्तन आज के धार्मिक महत्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कजरी तीज तृतीया तिथि से संबंधित है, जबकि चतुर्थी के आरंभ के बाद संकष्टी चतुर्थी का व्रत-क्रम आता है।
नक्षत्र: रेवती से अश्विनी
आज रेवती नक्षत्र प्रभावी है और देर रात के बाद अश्विनी नक्षत्र आरंभ होगा।
ज्योतिषीय परंपरा में रेवती को यात्रा, संरक्षण और पूर्णता से जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यताएं हैं; इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी या प्रमाणित कारण-परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
योग: गण्ड
आज गण्ड योग प्रभावी है और इसके बाद वृद्धि योग आता है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में गण्ड योग के समाप्त होने का समय रात के बाद दर्ज है, हालांकि स्थान के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।
करण: विष्टि के बाद बव
तृतीया के अंतिम हिस्से तक विष्टि करण रहता है और चतुर्थी शुरू होने के बाद बव करण आता है।
विष्टि करण को पारंपरिक ज्योतिष में भद्रा से जोड़ा जाता है। धार्मिक मुहूर्त निर्धारित करते समय इसे ध्यान में रखा जाता है।
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
1. कजरी तीज
आज कजरी तीज मनाई जा रही है। यह उत्तर भारत में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख तीज पर्व है।
कजरी तीज को कई जगह कजली तीज, कजरी या बड़ी तीज भी कहा जाता है। पारंपरिक रूप से यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया से जुड़ा पर्व है।
धार्मिक मान्यता
कई परंपराओं में महिलाएं पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए व्रत एवं पूजा करती हैं।
यह धार्मिक मान्यता है; इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्वास्थ्य या वैवाहिक परिणाम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
2. हेरंब संकष्टी चतुर्थी
आज कृष्ण पक्ष की चतुर्थी शुरू होने के कारण हेरंब संकष्टी चतुर्थी भी है। चतुर्थी लगभग 8:50 AM से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहने वाली है।
संकष्टी चतुर्थी की परंपरा भगवान गणेश की पूजा और व्रत से जुड़ी है। हेरंब गणपति को गणेश के 32 रूपों में एक माना जाता है।
चंद्रोदय और व्रत
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में कई परंपराओं के अनुसार चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय देखना जरूरी है।
शुभ और अशुभ समय: सावधानी के साथ
नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग में राहुकाल लगभग सुबह 7:34 से 9:09 बजे के आसपास बताया गया है। दूसरे पंचांग स्रोतों में कुछ मिनट का अंतर मिलता है।
इसलिए किसी महत्वपूर्ण शुभ कार्य के लिए केवल सामान्य इंटरनेट सूची के बजाय अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।
अभिजीत मुहूर्त
कुछ दिल्ली-आधारित पंचांगों में आज लगभग 11:56 AM से 12:46 PM के बीच अभिजीत मुहूर्त दिया गया है।
यह समय भी स्थान-आधारित है और अलग-अलग पंचांग प्रणालियों में अंतर संभव है।
आज का धार्मिक दृष्टिकोण
आज का दिन दो महत्वपूर्ण तिथियों के संक्रमण को दर्शाता है:
सुबह: कृष्ण तृतीया → कजरी तीज का धार्मिक संदर्भ
सुबह के बाद: कृष्ण चतुर्थी → संकष्टी चतुर्थी का संदर्भ
इस प्रकार एक ही दिन में तृतीया और चतुर्थी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का क्रम देखने को मिलता है।
आज क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु:
- अपनी परंपरा के अनुसार कजरी तीज की पूजा/व्रत कर सकते हैं।
- चतुर्थी शुरू होने के बाद गणेश पूजा और संकष्टी व्रत की परंपरा का पालन कर सकते हैं।
- गणेश मंत्र/पूजन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
- शाम के चंद्रोदय के समय को स्थानीय पंचांग से जांच सकते हैं।
- किसी बड़े शुभ कार्य के लिए स्थानीय मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।
व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार निर्णय लें।
ज्योतिष और विज्ञान: दोनों को अलग समझें
पंचांग सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थितियों तथा पारंपरिक भारतीय कालगणना पर आधारित है। वहीं शुभ-अशुभ प्रभाव, ग्रहों के कारण व्यक्तिगत भाग्य में परिवर्तन जैसी बातें ज्योतिषीय/धार्मिक मान्यताओं के दायरे में आती हैं।
आज का पंचांग: पाठकों के लिए Quick Guide
सुबह 8:50 बजे तक: कृष्ण तृतीया
8:50 बजे के बाद: कृष्ण चतुर्थी
नक्षत्र: रेवती → अश्विनी
चंद्र राशि: मीन
वार: सोमवार
प्रमुख पर्व: कजरी तीज
प्रमुख व्रत: हेरंब संकष्टी चतुर्थी
सूर्योदय, दिल्ली: लगभग 5:58 AM
सूर्यास्त, दिल्ली: लगभग 6:44 PM
राहुकाल, दिल्ली: लगभग 7:34–9:09 AM
Primary/Reference Panchang Sources: Drik Panchang और Delhi-specific Panchang calculations.
Editorial Disclaimer:
यह सामग्री पारंपरिक हिंदू पंचांग एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। शुभ-अशुभ फल और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े दावों को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। स्थानीय परंपरा और स्थान के अनुसार मुहूर्त/समय में अंतर हो सकता है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
