- एडिटोरियल डेस्क
H-1B Policy 2026: अमेरिका की H-1B नीति में सितंबर 2026 में एक और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए H-1B मामलों पर लागू $100,000 भुगतान की व्यवस्था को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाने की घोषणा की है। साथ ही, H-1B आवेदनों की जांच में प्रायोजक कंपनियों की हालिया या प्रस्तावित layoffs को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया गया है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी पेच है: $100,000 भुगतान की व्यवस्था फिलहाल अदालतों में चुनौती के कारण प्रभावी रूप से अटकी हुई है। जून 2026 में Massachusetts की संघीय अदालत ने इसे गैरकानूनी ठहराया था और मामला अपील में है। सितंबर की नई Presidential Proclamation ने अवधि बढ़ाई है, लेकिन उसने अपने-आप अदालत के फैसले को खत्म नहीं किया।
यही वजह है कि H-1B की कहानी को केवल “वीजा महंगा हुआ या नहीं” के सवाल से देखना अधूरा होगा। भारत के लिए बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका में skilled talent की entry अधिक महंगी, चयन अधिक wage-sensitive और employer scrutiny अधिक कड़ी होती है, तो भारतीय professionals की global mobility किस दिशा में जाएगी?
इस बदलाव में वास्तव में नया क्या है?
सितंबर 18, 2026 की Presidential Proclamation के तहत अमेरिका ने 2025 में शुरू की गई उस व्यवस्था को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाया है, जिसके तहत कुछ ऐसे नए H-1B workers के लिए, जो अमेरिका से बाहर हैं, petition के साथ $100,000 payment की आवश्यकता रखी गई है। इसमें national-interest आधारित अपवाद का प्रावधान भी है।
इसके साथ 18 सितंबर के Executive Order में एक और महत्वपूर्ण दिशा दी गई है। अब H-1B applications और petitions की समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि sponsoring employer ने पिछले वर्ष समान पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला था या भविष्य में ऐसी layoffs की योजना है।
अर्थात H-1B नीति का फोकस केवल “किसे वीजा मिलेगा?” से आगे बढ़कर “किस employer को, किस तरह के worker के लिए और किन परिस्थितियों में अनुमति मिलेगी?” की ओर जा रहा है।
भारतीयों के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
इसका पहला कारण आंकड़ा है।
USCIS की FY2024 रिपोर्ट के अनुसार, approved H-1B petitions में 71% beneficiaries का जन्म भारत में हुआ था। चीन लगभग 12% के साथ दूसरे स्थान पर था।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B worker भारतीय है या हर भारतीय applicant प्रभावित होगा। लेकिन यह स्पष्ट करता है कि अमेरिकी H-1B policy में होने वाला structural बदलाव भारतीय skilled professionals के लिए disproportionate relevance रखता है।
भारत की IT और technology ecosystem का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका के साथ cross-border talent movement, client-facing roles और technology delivery networks से जुड़ा रहा है। इसी कारण H-1B में बदलाव का असर व्यक्ति, employer और भारत में मौजूद technology ecosystem—तीनों स्तरों पर देखा जाना चाहिए।
सबसे बड़ा बदलाव: H-1B अब सिर्फ immigration route नहीं, employer strategy भी है
H-1B system में एक तरफ अमेरिका higher-skilled और higher-paid workers की ओर selection को मोड़ रहा है। DHS ने cap-subject H-1B registrations के लिए weighted selection process को finalise किया है, जिसमें सामान्य तौर पर अधिक skill और higher wage वाले candidates को अधिक महत्व दिया जाएगा, हालांकि lower wage levels पूरी तरह बाहर नहीं किए गए हैं।
दूसरी तरफ employer scrutiny भी बढ़ाई जा रही है।
इसका संभावित practical अर्थ यह है कि multinational कंपनियों के लिए केवल candidate की skill पर्याप्त नहीं होगी। Role, salary, employer profile, workforce planning और U.S. hiring history भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यही वह बिंदु है जहां H-1B policy भारतीय talent mobility के सवाल से जुड़ती है।
$100,000 fee: नीति और कानून के बीच अभी भी टकराव
यहां headline और legal reality को अलग रखना जरूरी है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि $100,000 payment और दूसरे बदलावों ने low-wage तथा low-skilled recruitment को हतोत्साहित किया है। White House ने दावा किया है कि सबसे बड़े IT outsourcing firms से H-1B registrations में 92% की कमी आई है। यह सरकारी दावा है, स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं।
दूसरी ओर, courts में इस व्यवस्था की वैधता चुनौती दी गई है। एक federal district court ने जून 2026 में $100,000 payment requirement को invalid कर दिया। इसी विषय पर Washington, D.C. की दूसरी federal court ने दिसंबर 2025 में सरकार के पक्ष में फैसला दिया था। दोनों न्यायिक दृष्टिकोणों के बीच अंतर ने मामला appellate litigation तक पहुंचाया है।
इसलिए भारतीय applicants और employers के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Presidential extension को final judicial settlement न समझा जाए।
एक और प्रस्तावित बदलाव: $103,265
$100,000 payment और एक अलग प्रस्तावित fee को भी एक ही चीज समझना सही नहीं होगा।
DHS ने 2026 में एक अलग proposed rule जारी किया है, जिसमें cap-subject H-1B petitions के लिए $103,265 की proposed fee का प्रावधान है। यह मौजूदा $100,000 proclamation से अलग regulatory proposal है और इसका उद्देश्य federal immigration-system administration की लागत का एक हिस्सा recover करना बताया गया है।
इसलिए अभी तीन अलग-अलग चीजें अलग रखनी होंगी:
- $100,000 — Presidential Proclamation से जुड़ी payment requirement, जिसकी कानूनी स्थिति अदालतों में चुनौती के अधीन है।
- $103,265 — DHS का अलग proposed rule।
- Existing H-1B fees — नियमित statutory/regulatory fees।
इन तीनों को मिलाकर “H-1B अब $103,265 का हो गया” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।
भारतीय talent mobility के सामने अब तीन रास्ते
1. अमेरिका जाना — लेकिन अधिक selective route के साथ
High-skill, high-wage और specialised roles वाले professionals के लिए अमेरिकी market अभी भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है। लेकिन employer sponsorship और immigration compliance की लागत तथा uncertainty decision-making में अधिक weight रख सकती है।
2. भारत में रहकर global work
अगर कंपनियां कुछ technology work को U.S. visa constraints से बचाने के लिए India-based teams, Global Capability Centres या remote delivery models में बढ़ाती हैं, तो भारतीय professionals के लिए “भारत से global career” का महत्व बढ़ सकता है।
यह दावा कि पूरा talent flow अमेरिका से भारत वापस आ जाएगा, अभी उपलब्ध evidence से साबित नहीं होता। लेकिन कंपनियों की location और workforce strategy बदलने की संभावना इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
3. तीसरे देशों की ओर mobility
Global talent mobility अब केवल India → USA मॉडल तक सीमित नहीं है। Canada, UK, Australia, Germany और अन्य technology hubs भी skilled workers के लिए विकल्प बने हुए हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका भारतीय talent के लिए अप्रासंगिक हो जाएगा। सवाल यह है कि क्या वह पहले की तरह default destination बना रहेगा, या talent increasingly multi-country strategy अपनाएगा?
भारत के लिए असली सवाल क्या है?
H-1B पर अमेरिकी नीति में बदलाव को केवल भारतीय professionals की “America जाने की समस्या” के रूप में देखना सीमित दृष्टिकोण होगा।
भारत के लिए बड़ा अवसर यह हो सकता है कि वह:
- high-end technology roles को देश में बनाए,
- AI, semiconductor, cybersecurity और advanced engineering talent विकसित करे,
- Global Capability Centres को केवल support functions से आगे बढ़ाकर product और R&D hubs बनाए,
- returning professionals के लिए बेहतर career opportunities तैयार करे,
- और भारतीय companies को global technology value chain में higher-value positions लेने में सक्षम बनाए।
लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत केवल “talent retention” की बात न करे। Global professionals salary, research opportunities, career mobility, infrastructure, education और quality of life जैसे कई factors को साथ देखकर निर्णय लेते हैं।
अमेरिकी दृष्टिकोण बनाम भारतीय talent perspective
अमेरिकी प्रशासन का तर्क: H-1B system का इस्तेमाल अमेरिकी workers को replace करने या wages पर दबाव डालने के लिए नहीं होना चाहिए। इसलिए higher-skilled recruitment, wage considerations और employer scrutiny बढ़ाई जा रही है।
Business/industry perspective: technology companies और industry groups का एक तर्क यह रहा है कि H-1B skilled-worker shortages को भरने और technology ecosystem को talent उपलब्ध कराने में मदद करता है। Reuters के अनुसार, Nasscom ने भी अमेरिका से H-1B के skill-shortage वाले उद्देश्य को ध्यान में रखने का आग्रह किया है।
भारतीय talent perspective: भारत से बड़ी संख्या में professionals H-1B ecosystem से जुड़े हैं, इसलिए policy uncertainty का असर career planning, employer sponsorship और international mobility decisions पर पड़ सकता है। USCIS के FY2024 data में India-born beneficiaries का 71% हिस्सा इस exposure को स्पष्ट करता है।
इन तीनों दृष्टिकोणों को साथ देखे बिना H-1B debate अधूरी रहती है।
अब आगे क्या देखना होगा?
अगले चरण में चार developments विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगे:
1. अदालतों का फैसला
$100,000 payment requirement की legal validity पर appellate proceedings क्या दिशा लेती हैं।
2. $103,265 proposed rule
DHS के proposed fee पर final regulatory decision क्या होता है।
3. FY2027 weighted selection
Higher-wage और higher-skill applicants को preference देने वाली व्यवस्था व्यवहार में selection pattern को कितना बदलती है।
4. कंपनियों की workforce strategy
क्या U.S. employers offshore/nearshore hiring और India-based technology operations को बढ़ाते हैं या अमेरिकी hiring के लिए नए compensation और compliance models अपनाते हैं।
केंद्रीय सवाल
H-1B का सवाल अब केवल यह नहीं है कि कितने भारतीय अमेरिका जा पाएंगे।
बड़ा सवाल यह है:
क्या global talent mobility का पुराना India → U.S. मॉडल बदलकर India ↔ U.S. ↔ Other Global Hubs का अधिक diversified model बन रहा है?
इसका उत्तर अभी पूरी तरह तय नहीं है। लेकिन 2026 के policy changes यह जरूर दिखाते हैं कि वीजा नीति, employer economics और talent strategy अब पहले से कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं।
भारत के लिए चुनौती यह नहीं कि वह केवल अपने talent को विदेश जाने से रोके। चुनौती यह है कि भारतीय talent के पास दुनिया में कहीं भी काम करने का विकल्प हो—और भारत स्वयं high-value global talent ecosystem का मजबूत केंद्र बने।
Editorial Note: $100,000 payment requirement और $103,265 proposed fee को अलग-अलग regulatory/legal measures के रूप में समझना चाहिए। अदालतों में लंबित मामलों के कारण H-1B policy की कुछ स्थितियां बदल सकती हैं।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
