- ब्यूरो डेस्क
West Bengal Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान समाप्त हो गया। चुनाव आयोग के अधिकारियों के हवाले से शुरुआती 5 बजे तक नंदीग्राम में 79.39% और रेजीनगर में 78.42% मतदान दर्ज हुआ था। बाद की अपडेट में दोनों सीटों का मतदान क्रमशः करीब 80.87% और 80.07% बताया गया।
मतदान के दौरान हुमायूं कबीर की पुलिस हिरासत, बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं को प्रभावित करने के विपक्षी आरोप तथा बीजेपी की ओर से इन आरोपों के खंडन ने चुनाव को सिर्फ मतदान प्रतिशत की कहानी नहीं रहने दिया। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार, 6 अक्टूबर, नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए मतदान का दिन रहा। दोनों विधानसभा सीटों पर मतदान शाम 6 बजे तक चला और कतार में मौजूद मतदाताओं को वोट डालने की अनुमति दी गई।
उपचुनाव में मतदाताओं की भागीदारी ऊंची रही। 5 बजे तक चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार नंदीग्राम में 79.39% और रेजीनगर में 78.42% मतदान हुआ था। बाद में प्रकाशित अपडेट में इन दोनों सीटों का मतदान क्रमशः लगभग 80.87% और 80.07% तक पहुंचने की जानकारी दी गई।
दोनों सीटों पर कुल मिलाकर लगभग 5.24 लाख मतदाता हैं। रेजीनगर में 2,57,657 और नंदीग्राम में 2,67,157 मतदाता दर्ज थे।
मतदान के दौरान विवाद क्यों उठा?
रेजीनगर में AJUP प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस ने उस समय हिरासत में लिया, जब मतदान के दौरान उनका पुलिस के साथ विवाद हुआ। कबीर ने मतदान केंद्रों पर पुलिस हस्तक्षेप और अपने कार्यकर्ताओं/एजेंटों को रोके जाने के आरोप लगाए। बाद में उन्हें करीब रात 9 बजे रिहा कर दिया गया। चुनाव आयोग ने इस हिरासत के संबंध में रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि कुछ मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया और बीजेपी एजेंटों पर बूथ कब्जाने तथा पुलिस की मदद मिलने का आरोप लगाया। रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी ने भी बूथ कब्जे का आरोप लगाते हुए विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार राबिउल आलम चौधरी ने पुनर्मतदान की मांग वाला पत्र राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजा।
दूसरी ओर, बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी नंदीग्राम में मतदान को शांतिपूर्ण बताया।
चुनाव आयोग के पास कितनी शिकायतें आईं?
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार मतदान के दौरान Complaint Monitoring System पर 37 शिकायतें और National Grievance Service Portal पर 60 शिकायतें प्राप्त हुईं। कुल मिलाकर ये शिकायतें चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामने आए विवादों की औपचारिक तस्वीर देती हैं, लेकिन केवल शिकायत दर्ज होना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है।
नंदीग्राम में मुकाबला क्यों महत्वपूर्ण है?
नंदीग्राम सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व रखने वाला क्षेत्र है। यह 2011 में तृणमूल कांग्रेस के उभार से जुड़े भूमि-अधिग्रहण आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा और 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने यहीं ममता बनर्जी को हराया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम फिर जीता, लेकिन दूसरी सीट भवानीपुर को बनाए रखने के कारण नंदीग्राम खाली हुआ और उपचुनाव कराना पड़ा।
बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं। कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान मैदान में हैं। तृणमूल के एक गुट की उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया। अन्य दलों के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में रहे।
रेजीनगर का समीकरण अलग है
रेजीनगर में मुकाबला अधिक बहुकोणीय है। सीट खाली होने की वजह यह रही कि हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नौदा दोनों सीटें जीतीं और बाद में नौदा को बरकरार रखा। उनके गुट AJUP ने उनके बेटे गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया। बीजेपी ने सखारव सरकार, तृणमूल कांग्रेस ने राबिउल आलम चौधरी, विरोधी तृणमूल गुट ने सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी और CPI(M) ने सैयद असद अली को मैदान में उतारा।
रेजीनगर में अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए यह मुकाबला बीजेपी की व्यापक सामाजिक पहुंच और विपक्षी दलों की जमीन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि उपचुनाव का परिणाम अकेले राज्य की व्यापक राजनीतिक दिशा तय नहीं करेगा।
करीब 80% मतदान से ज्यादा महत्वपूर्ण है “वोट के बाद की वैधता” का सवाल
इन दोनों सीटों की कहानी को केवल “बंपर वोटिंग” कहकर सीमित करना अधूरा होगा। असली राजनीतिक महत्व तीन स्तरों पर है:
पहला, क्या ऊंचा मतदान किसी स्पष्ट राजनीतिक लहर की ओर इशारा करता है या दोनों सीटों पर अलग-अलग स्थानीय मुद्दे हावी रहे?
दूसरा, बीजेपी के सत्ता में आने के बाद क्या नंदीग्राम और रेजीनगर उसके शासन की शुरुआती स्वीकार्यता के संकेत देते हैं?
तीसरा, विपक्ष द्वारा पुनर्मतदान और अनियमितताओं के आरोपों पर चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई क्या होगी?
यानी 6 अक्टूबर का मतदान समाप्त हो चुका है, लेकिन चुनावी विवाद का पूरा अध्याय अभी बंद नहीं हुआ है।
क्या बदला?
नंदीग्राम का उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सीट खाली करने के कारण हुआ, जबकि रेजीनगर में हुमायूं कबीर द्वारा दो सीटों में से एक छोड़ने के कारण चुनाव जरूरी हुआ। दोनों सीटों पर इसलिए चुनाव हुआ क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद इनके प्रतिनिधित्व की स्थिति बदल गई।
What Next?
अब सबसे बड़ा पड़ाव 9 अक्टूबर 2026 की मतगणना है। परिणाम बताएगा कि ऊंचा मतदान किस राजनीतिक ताकत में बदला, लेकिन उसके साथ-साथ चुनाव आयोग के सामने आई शिकायतों पर कार्रवाई और किसी संभावित पुनर्मतदान की मांग भी निगरानी में रहेगी।
Fact Sheet
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| मतदान | 6 अक्टूबर 2026 |
| मतदान समय | सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे |
| नंदीग्राम | 5 बजे तक 79.39%; बाद की अपडेट में करीब 80.87% |
| रेजीनगर | 5 बजे तक 78.42%; बाद की अपडेट में करीब 80.07% |
| कुल मतदाता | लगभग 5.24 लाख |
| नंदीग्राम मतदाता | 2,67,157 |
| रेजीनगर मतदाता | 2,57,657 |
| प्रमुख विवाद | बूथ कब्जा/मतदाता दबाव के आरोप, पुलिस कार्रवाई |
| हुमायूं कबीर | मतदान दिवस पर हिरासत, बाद में रिहा |
| मतगणना | 9 अक्टूबर 2026 |
5 बजे तक के आंकड़े चुनाव आयोग के अधिकारियों के हवाले से उपलब्ध हैं; बाद की turnout update अलग समय पर जारी हुई, इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही समय का प्रतिशत नहीं समझना चाहिए।
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