- डेस्क टीम
आज का पंचांग 19 अक्टूबर 2026 : आज सोमवार, 19 अक्टूबर को नई दिल्ली के पंचांग में आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी के बाद नवमी तिथि का उल्लेख है। द्रिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी सुबह लगभग 10:51 बजे तक रही। इसके बाद नवमी तिथि आरंभ हुई। आज का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, जो दोपहर लगभग 3:38 बजे तक रहा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हुआ।
दैनिक पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ सूर्योदय, सूर्यास्त तथा विभिन्न मुहूर्तों का विवरण दिया जाता है। इन समयों की गणना स्थान के अनुसार की जाती है, इसलिए दिल्ली के समय को दूसरे शहरों के लिए सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
आज का पंचांग: 19 अक्टूबर 2026
- दिन: सोमवार
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: शुक्ल अष्टमी सुबह लगभग 10:51 बजे तक; इसके बाद नवमी
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा दोपहर लगभग 3:38 बजे तक; इसके बाद श्रवण
- योग: धृति, जो मध्यरात्रि के बाद लगभग 12:35 बजे तक बताया गया है
- करण: बव सुबह लगभग 10:51 बजे तक; इसके बाद बालव
- सूर्योदय: सुबह लगभग 6:24 बजे
- सूर्यास्त: शाम लगभग 5:48 बजे
ये समय नई दिल्ली के लिए गणना पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांगों में गणना-पद्धति, स्थान-निर्धारण और राउंडिंग के कारण कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
दिल्ली में आज राहुकाल और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज नई दिल्ली में राहुकाल सुबह लगभग 7:50 बजे से 9:15 बजे तक था। अभिजित मुहूर्त लगभग सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक बताया गया है।
दिन के प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
- राहुकाल: सुबह 7:50 से 9:15 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 1:31 से 2:57 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक
- अमृत काल: सुबह लगभग 8:29 से 10:16 बजे तक
समय संबंधी जरूरी सूचना: किसी विशेष पूजा, व्रत या संस्कार के लिए स्थानीय परंपरा और संबंधित पंचांग की पुष्टि करना उचित है।
अष्टमी और नवमी का धार्मिक महत्त्व
हिंदू पंचांग में अष्टमी और नवमी तिथियों का धार्मिक महत्त्व है। नवरात्र की परंपरा में इन तिथियों पर देवी-पूजन, कन्या-पूजन और अन्य अनुष्ठान किए जाते हैं। हालांकि, किसी विशेष अनुष्ठान की तिथि और विधि परिवार, क्षेत्र, संप्रदाय तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है।
तिथि का निर्धारण चंद्रमा और सूर्य की खगोलीय स्थिति के आधार पर किया जाता है। इसी वजह से तिथि का आरंभ और समापन सामान्य नागरिक कैलेंडर की आधी रात से मेल खाना आवश्यक नहीं है। एक ही अंग्रेजी तारीख में दो तिथियाँ पड़ सकती हैं।
पंचांग पढ़ते समय इन बातों का ध्यान रखें
- शहर की पुष्टि करें: सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल स्थानीय भौगोलिक स्थिति से प्रभावित होते हैं।
- तिथि समाप्ति का समय देखें: केवल तिथि का नाम जानना पर्याप्त नहीं है; उसका आरंभ और समापन भी महत्त्वपूर्ण हो सकता है।
- परंपरा का अंतर समझें: अलग-अलग पंचांगों में गणना या अनुष्ठान संबंधी मतभेद संभव हैं।
- धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक तथ्य अलग रखें: पंचांग में खगोलीय गणना के साथ पारंपरिक धार्मिक व्याख्याएँ भी होती हैं। शुभ-अशुभ मुहूर्त का निर्धारण धार्मिक परंपरा का विषय है, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध भविष्यवाणी नहीं।
अस्वीकरण: यह सामग्री धार्मिक कैलेंडर और पारंपरिक पंचांग की जानकारी के उद्देश्य से है। शुभ-अशुभ समय संबंधी मान्यताएँ परंपरा पर आधारित हैं।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
