- न्यूज मंत्रा लाइव बिजनेस डेस्क
19 अगस्त 1950 को कर्नाटक के शिगगांव में जन्मी सुधा मूर्ति (Sudha Murty) का जीवन हर महिला और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। वे एक साथ इंजीनियर, लेखिका, शिक्षिका और समाजसेवी के रूप में जानी जाती हैं।
टाटा मोटर्स की पहली महिला इंजीनियर
सुधा मूर्ति ने कर्नाटक इंजीनियरिंग कॉलेज से सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। बावजूद इसके, जब उन्होंने टाटा मोटर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया तो एक विज्ञापन में साफ लिखा था – “महिला उम्मीदवार आवेदन न करें।”
लेकिन मूर्ति ने हार नहीं मानी। उन्होंने साहस दिखाते हुए सीधे जे.आर.डी. टाटा को पत्र लिखा और महिलाओं के रोजगार अधिकार की मांग की। इसी साहसिक कदम ने उन्हें टाटा मोटर्स की पहली महिला इंजीनियर बनाया।
साहित्य और लेखन की दुनिया
सुधा मूर्ति ने अब तक 40 से अधिक किताबें लिखी हैं, जिनमें उपन्यास, लघुकथाएँ, यात्रा-वृत्तांत और बच्चों की किताबें शामिल हैं। उनकी चर्चित किताबों में शामिल हैं –
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Dollar Bahu
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Three Thousand Stitches
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Wise and Otherwise
उनकी कहानियाँ जीवन अनुभवों, यात्राओं और समाज की सच्चाइयों से प्रेरित होती हैं। वे अक्सर पौराणिक कथाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को मूल्यों से जोड़ती हैं।
पुरस्कार और सम्मान
सुधा मूर्ति को उनके सामाजिक और साहित्यिक योगदान के लिए कई सम्मान मिले हैं, जिनमें प्रमुख हैं –
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2023 – साहित्य अकादमी पुरस्कार
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2006 – आर.के. नारायण साहित्य पुरस्कार
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2020 – लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार
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भारत के कई विश्वविद्यालयों से 10 मानद डॉक्टरेट उपाधियाँ
समाजसेवा और प्रेरणा
सुधा मूर्ति ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई पहल की हैं। वे इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन भी रही हैं और ग्रामीण भारत में शिक्षा व अस्पतालों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया है।
उनकी मान्यता है – “अगर महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं दिए जाएंगे तो देश कभी प्रगति नहीं कर पाएगा।”
सुधा मूर्ति और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का किस्सा
एक बार देश के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें फोन किया। पहले तो सुधा मूर्ति को लगा यह कोई मज़ाक या गलती से किया गया कॉल है। लेकिन बाद में राष्ट्रपति ने खुद कहा – “मैं अक्सर आपके लिखे लेख पढ़ता हूँ।”
यह घटना उनके योगदान और प्रभाव को दर्शाती है।
सुधा मूर्ति का जीवन इस बात का प्रमाण है कि साहस, शिक्षा और मेहनत से महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।
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