- न्यूज मंत्रा लाइव टीम
News Avoidance : एक समय था जब सुबह की शुरुआत अख़बार से होती थी और रात न्यूज़ बुलेटिन पर खत्म। लेकिन अब वही लोग न्यूज़ से दूरी बना रहे हैं। सवाल सिर्फ़ “क्या हो रहा है?” का नहीं, बल्कि “क्या सच बताया जा रहा है?” का है। न्यूज़ अवॉयडेंस यानी खबरों से बचने की प्रवृत्ति आज भारत ही नहीं, दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ रही है।
न्यूज़ थकान: हर दिन नकारात्मकता का बोझ
लगातार ब्रेकिंग न्यूज़, हत्या, हादसे, युद्ध, राजनीति की तकरार—दर्शकों और पाठकों को मानसिक रूप से थका रही है।
लोग कहते हैं:
“न्यूज़ देखो तो तनाव बढ़ता है, न देखो तो अपराधबोध।”
यही थकान धीरे-धीरे न्यूज़ से दूरी बनाती है।
डर का माहौल: सूचना या भय?
कई बार न्यूज़ सूचना देने के बजाय डर पैदा करती दिखती है—
-
महामारी
-
आर्थिक संकट
-
युद्ध
-
अपराध
डर आधारित हेडलाइन्स क्लिक तो बढ़ाती हैं, लेकिन भरोसा घटाती हैं।
अविश्वास: एजेंडा बनाम पत्रकारिता
दर्शकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि न्यूज़ अब:
-
सत्ता समर्थक या विरोधी बन चुकी है
-
बहस कम, शोर ज़्यादा है
-
फैक्ट से ज़्यादा राय पर ज़ोर है
यही कारण है कि लोग न्यूज़ को “सूचना” नहीं, “प्रोपेगेंडा” मानने लगे हैं।
सोशल मीडिया का शोर
आज न्यूज़ का पहला स्रोत अख़बार या टीवी नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन है।
लेकिन सोशल मीडिया पर:
-
अधूरी जानकारी
-
भ्रामक हेडलाइन
-
बिना स्रोत के दावे
लोगों को कन्फ्यूज़ कर देते हैं। नतीजा—लोग न्यूज़ से ही दूरी बना लेते हैं।
Fact :
- न्यूज़ अवॉयडेंस बढ़ रही है
अंतरराष्ट्रीय शोधों के अनुसार, हर साल न्यूज़ से जानबूझकर दूरी बनाने वालों की संख्या बढ़ रही है।
- युवा सबसे ज़्यादा दूरी बना रहे हैं
18–30 आयु वर्ग के लोग न्यूज़ को “मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदेह” मान रहे हैं।
- भरोसेमंद न्यूज़ की कमी
लोग न्यूज़ छोड़ नहीं रहे, बल्कि अविश्वसनीय न्यूज़ छोड़ रहे हैं।
Time Line :
- 2010–2015 : डिजिटल न्यूज़ का उभार, सोशल मीडिया पर तेज़ी से खबरें।
- 2016–2020 : ब्रेकिंग न्यूज़ कल्चर, प्राइम-टाइम डिबेट्स का चरम।
- 2020–2022 : कोविड काल—लगातार डर और नेगेटिव न्यूज़।
- 2023–2025 : न्यूज़ अवॉयडेंस, सब्सक्रिप्शन थकान, भरोसे का संकट।
अगर न्यूज़ को वापस लोगों तक पहुँचना है, तो मीडिया को पूछना होगा:
क्या हम सच दिखा रहे हैं या सिर्फ़ शोर बेच रहे हैं? पाठक-दर्शकों से अपील—न्यूज़ छोड़ने से पहले स्रोत बदलकर देखिए।
Disclaimer : यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक शोध, मीडिया ट्रेंड्स और पत्रकारिता विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी संस्था या प्लेटफ़ॉर्म को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सूचना व्यवहार को समझना है।
Source :
- Reuters Institute – Digital News Report (Global Media Studies)
- Pew Research Center – News Consumption Trends
- Media Trust & Audience Behavior Studies
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
