- डेस्क टीम
साफ शहर : 29 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने PRAGATI-50 पहल शुरू की, जिसके तहत 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 50 शहरों को स्वच्छता के लिए model cities के रूप में विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुसार पहल KPI-based action और technology-enabled monitoring के जरिए शहरों में visible cleanliness के मानक को ऊपर उठाने पर केंद्रित है।
लेकिन इसी समय देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ ने एक पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है—क्या किसी शहर को केवल इसलिए “स्वच्छ” माना जा सकता है क्योंकि सड़कें साफ दिखाई देती हैं?
केंद्र के शहरी मामलों के मंत्रालय ने जुलाई 2026 में स्वयं कहा था कि urban flooding को तेज बारिश के साथ-साथ unplanned growth, प्राकृतिक जल निकासी तंत्र पर अतिक्रमण, अपर्याप्त sewer और stormwater drainage systems जैसी समस्याएं बढ़ाती हैं।
इसलिए आज का बड़ा सवाल सफाई से आगे जाकर शहरी resilience का है।
शहर की सफाई का मतलब सिर्फ सड़क पर कूड़ा न होना नहीं है
किसी शहर की तस्वीर लेने के लिए कैमरा उठाइए।
सुबह सड़क साफ है। कूड़ेदान व्यवस्थित हैं। फुटपाथ पर सफाई दिख रही है। कहीं-कहीं पौधे भी लगे हैं।
लेकिन शाम को तेज बारिश के बाद वही सड़क पानी में डूब जाए, नाला ओवरफ्लो हो जाए, पैदल चलना मुश्किल हो जाए और लोगों का रोजमर्रा का काम रुक जाए—तो क्या शहर को पूरी तरह “स्वच्छ” कहा जा सकता है?
यहीं cleanliness और livability के बीच अंतर सामने आता है।
स्वच्छता जरूरी है। लेकिन रहने योग्य शहर के लिए स्वच्छता के साथ drainage, water management, roads, public spaces, waste collection, sanitation और emergency response भी जरूरी हैं।
PRAGATI-50 ने एक अवसर पैदा किया है—मानक बड़ा करने का
सरकार के अनुसार PRAGATI-50 के तहत चुने गए 50 शहरों में sanitation performance को measurable indicators और technology-based monitoring के जरिए मजबूत किया जाएगा। पहल का घोषित उद्देश्य इन शहरों को स्वच्छता के बेहतर benchmark के रूप में विकसित करना है।
इस पहल को देखने का एक उपयोगी तरीका यह हो सकता है कि “स्वच्छ शहर” की परिभाषा को केवल visible cleanliness तक सीमित न रखा जाए।
क्योंकि शहर की वास्तविक गुणवत्ता उस समय दिखाई देती है जब परिस्थितियां सामान्य नहीं होतीं।
बारिश हो।
हीटवेव आए।
कचरा संग्रहण में व्यवधान हो।
पानी की कमी हो।
या सार्वजनिक infrastructure पर अचानक दबाव बढ़ जाए।
ऐसे समय में शहर कितनी जल्दी normal life बनाए रखता है—यह भी urban quality का हिस्सा है।
बारिश शहर का सबसे ईमानदार report card बन सकती है
29 सितंबर 2026 की Reuters रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से बड़ी जनहानि और व्यापक नुकसान हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य स्तर से कई गुना अधिक रही।
हर बाढ़ का कारण नगर निकाय की विफलता बताना सही नहीं होगा। अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाएं कई बार किसी भी infrastructure पर बड़ा दबाव डाल सकती हैं।
लेकिन urban flooding पर केंद्र सरकार की अपनी 2026 की जानकारी यह स्वीकार करती है कि short-duration high-intensity rainfall के साथ unplanned urban growth, प्राकृतिक water bodies पर encroachment और inadequate drainage systems जोखिम बढ़ा सकते हैं।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितनी बारिश हुई।
सवाल यह भी है:
शहर ने उस बारिश के पानी के लिए कितना रास्ता छोड़ा था?
नाले बड़े करना ही पूरा समाधान नहीं है
शहरी जलभराव पर अक्सर चर्चा drains की सफाई या उनकी capacity बढ़ाने तक सीमित हो जाती है।
लेकिन शहर में पानी का पूरा चक्र इससे बड़ा है।
बारिश का पानी कहाँ से आता है?
वह सड़क पर कितना बहता है?
कितना जमीन में जाता है?
कितना stormwater network में पहुंचता है?
प्राकृतिक ponds, lakes, wetlands और low-lying areas की क्या भूमिका है?
कंक्रीट बढ़ने के साथ rainwater infiltration कितना घटा है?
इन सवालों को साथ देखे बिना केवल “नाला साफ था या नहीं” से पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
एक और विरोधाभास: शहर में पानी भी, पानी की कमी भी
हालिया रिपोर्टिंग में गुरुग्राम के संदर्भ में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने groundwater depletion, rapid urbanisation और monsoon waterlogging पर चिंता जताई है। अदालत के सामने यह विरोधाभास भी आया कि भारी बारिश के बावजूद शहर water crisis का सामना कर सकता है।
यही भारत के कई तेजी से बढ़ते शहरों की जटिल समस्या है।
एक तरफ बारिश के दौरान पानी संभालना मुश्किल।
दूसरी तरफ गर्मियों में पानी की चिंता।
इसका मतलब है कि urban water policy को केवल “जलभराव रोकने” की policy मानना पर्याप्त नहीं है।
बारिश का पानी समस्या से संसाधन भी बन सकता है—लेकिन उसके लिए recharge, water-body protection, harvesting और land-use planning को एक साथ देखना होगा।
क्या “Clean City” को नए अर्थ की जरूरत है?
शायद अब शहर के लिए एक broader definition पर बात होनी चाहिए।
एक ऐसा शहर जो:
साफ हो,
बारिश में जल्दी recover करे,
पानी बचाए,
कचरे को व्यवस्थित तरीके से संभाले,
सार्वजनिक स्थानों को उपयोगी रखे,
पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित हो,
और सबसे महत्वपूर्ण—अपने सबसे कमजोर नागरिकों के लिए भी काम करे।
क्योंकि शहर की गुणवत्ता केवल VIP zones में दिखाई देने वाली cleanliness से तय नहीं होती।
वह उस मजदूर के रास्ते में भी दिखाई देती है जो रोज काम पर जाता है।
उस छात्र के रास्ते में भी जो स्कूल या कॉलेज पहुंचता है।
उस दुकानदार के सामने भी जो बारिश के बाद दुकान खोलता है।
और उस परिवार में भी जो बाढ़, जलभराव या पानी की कमी के कारण रोजमर्रा की जिंदगी बदलने पर मजबूर होता है।
Analysis
भारत के शहर एक साथ कई pressures झेल रहे हैं—urbanisation, extreme weather, waste management, water stress और infrastructure demand।
इसलिए “स्वच्छ शहर” का अगला चरण शायद केवल सफाई का अभियान नहीं, बल्कि शहरी क्षमता का परीक्षण होना चाहिए।
PRAGATI-50 का घोषित focus sanitation benchmarks और monitoring पर है।
Urban flooding पर केंद्र की अपनी जानकारी drainage, natural water systems और unplanned growth को भी महत्वपूर्ण factors मानती है।
इन दोनों बातों को साथ पढ़ने पर एक व्यापक editorial question सामने आता है:
क्या हम ऐसे शहर बना रहे हैं जो सामान्य दिनों में अच्छे दिखें, या ऐसे शहर जो मुश्किल दिनों में भी काम करते रहें?
यही अंतर सुंदर शहर और सक्षम शहर के बीच हो सकता है।
Social Questions
क्या शहरों की performance केवल cleanliness indicators से मापी जानी चाहिए?
क्या drainage, groundwater recharge और water-body protection को urban planning के मुख्य indicators में अधिक महत्व मिलना चाहिए?
क्या किसी शहर की annual assessment में यह भी देखा जाना चाहिए कि भारी बारिश, heatwave या water stress के दौरान उसकी essential services कितनी जल्दी स्थिर होती हैं?
और क्या नागरिकों को केवल cleanliness campaign का participant नहीं, बल्कि urban planning का stakeholder भी माना जाना चाहिए?
भारत को साफ शहर चाहिए।
लेकिन अब सवाल शायद इससे बड़ा है।
हमें ऐसे शहर चाहिए जो साफ भी हों, सुरक्षित भी हों और resilient भी।
सड़क से कूड़ा हटाना दिखाई देता है।
लेकिन बारिश का पानी कहाँ जाएगा, groundwater कैसे बचेगा, natural water systems कैसे रहेंगे और शहर extreme weather में कैसे चलेगा—ये फैसले उतने दिखाई नहीं देते।
फिर भी आने वाले वर्षों में शहरों की वास्तविक गुणवत्ता शायद इन्हीं अदृश्य फैसलों से तय होगी।
साफ शहर एक लक्ष्य है।
रहने योग्य और संकट-सहने वाला शहर उससे बड़ा लक्ष्य है।
Data Snapshot
50 शहर — PRAGATI-50 पहल में चयनित model cities
24 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश — पहल का दायरा
64 शहर — जुलाई 2026 तक Heat Action Plans वाले शहरों की संख्या, केंद्र की दी गई जानकारी के अनुसार।
Context
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में urban flooding के कारणों में high-intensity rainfall, unplanned urban growth, natural water bodies पर encroachment और inadequate drainage systems जैसे factors का उल्लेख किया।
सितंबर 2026 में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ से व्यापक नुकसान की रिपोर्टें सामने आईं।
इसी समय PRAGATI-50 के जरिए 50 शहरों के sanitation standards पर measurable monitoring का नया framework सामने आया है।
What Next
शहरी विकास की चर्चा में cleanliness के साथ ये प्रश्न भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं:
Drainage + Water Recharge + Waste Management + Natural Water Systems + Public Spaces + Climate Resilience
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